CM Yogi Noida Visit: उत्तर प्रदेश की राजनीति में नोएडा से जुड़ा एक दिलचस्प मिथक लंबे समय से चर्चा में रहा है। कहा जाता रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी सत्ता चली जाती है। हालांकि, इस मिथक की शुरुआत अखिलेश यादव या मायावती के दौर से नहीं, बल्कि करीब 38 साल पहले हुई थी।
CM Yogi Noida Visit: 1988 में वीर बहादुर सिंह से शुरू हुआ किस्सा-
साल 1988 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने नोएडा पहुंचे थे। बताया जाता है कि नोएडा से लखनऊ लौटने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद नोएडा को लेकर यह धारणा बनने लगी कि यहां जाने से मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है।
CM Yogi Noida Visit: एनडी तिवारी और मुलायम सिंह यादव भी आए चपेट में-
वीर बहादुर सिंह के बाद एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने और कुछ समय बाद नोएडा के दौरे पर पहुंचे। इसके बाद उनकी सरकार भी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। साल 1995 में मुलायम सिंह यादव भी आधिकारिक दौरे पर नोएडा पहुंचे थे। उस समय उनकी सरकार बसपा के समर्थन से चल रही थी। कुछ महीनों बाद मायावती ने समर्थन वापस ले लिया और मुलायम सरकार गिर गई।
मायावती और कल्याण सिंह के साथ भी जुड़ा मिथक-
मायावती 1997 में मुख्यमंत्री बनीं और नोएडा दौरे पर गईं। इसके कुछ समय बाद बीजेपी ने उनकी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद 1999 में मुख्यमंत्री बने कल्याण सिंह ने भी नोएडा जाकर इस मिथक को चुनौती दी। हालांकि, कुछ समय बाद उनकी सरकार भी चली गई।
राजनाथ सिंह और रामप्रकाश गुप्ता ने बनाई दूरी-
लगातार घटनाओं के बाद नोएडा को लेकर यह मिथक इतना मजबूत हो गया कि कई मुख्यमंत्रियों ने अपने कार्यकाल में यहां जाने से दूरी बनाए रखी। राजनाथ सिंह और रामप्रकाश गुप्ता भी मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा नहीं गए।
मायावती ने लखनऊ से ही कर दिया था शिलान्यास-
2002 में दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद मायावती ने इस मिथक को लेकर सावधानी बरती। नोएडा एक्सप्रेसवे और गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास उन्होंने नोएडा जाकर करने के बजाय लखनऊ से ही कर दिया। वहीं, राजनाथ सिंह ने भी डीएनडी का उद्घाटन नोएडा की जगह दिल्ली जाकर किया था।
मुलायम पूरे कार्यकाल में नहीं गए नोएडा-
इसके बाद मुलायम सिंह यादव जब सत्ता में लौटे तो उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में नोएडा से दूरी बनाए रखी। खास बात यह रही कि इसी दौरान नोएडा में निठारी जैसा चर्चित कांड भी हुआ, लेकिन वह मौके पर नहीं पहुंचे।
योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा मिथक-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा जाकर इस पुराने मिथक को चुनौती दी। वह कई बार नोएडा का दौरा कर चुके हैं और सत्ता में भी बने रहे। इसी वजह से वह अक्सर इस मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हैं, जो अपने कार्यकाल में नोएडा नहीं गए थे। इस तरह नोएडा से जुड़ा यह राजनीतिक मिथक करीब चार दशक से यूपी की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने और नोएडा दौरे के बीच कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक संबंध नहीं है, फिर भी कई नेताओं के अनुभवों ने इस धारणा को लंबे समय तक जिंदा रखा।
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