Congress Hijacked Plane: भारतीय राजनीति में कुछ पुराने घटनाक्रम ऐसे हैं, जो दशकों बाद भी राजनीतिक बहस में लौट कर आते हैं। कांग्रेस के इतिहास से जुड़ा 1978 का इंडियन एयरलाइंस विमान अपहरण और 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) नेता यासीन मलिक से मुलाकात भी इसी तरह चर्चा में रहती है। आईए जानते है क्या पूरा मामला।
एक घटना में इंदिरा गांधी की रिहाई की मांग को लेकर दो युवकों ने विमान को हाईजैक किया था। बाद में यही दोनों कांग्रेस की राजनीति में आगे बढ़े और विधायक बने। दूसरी घटना में कश्मीर में संवाद प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यासीन मलिक से मुलाकात की। वर्षों बाद मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में दावा किया कि 2006 में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद से मुलाकात के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उसके प्रयासों के लिए आभार जताया था। यह मलिक का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि रिकॉर्ड में नहीं है। तो क्या इन दोनों घटनाओं को एक ही राजनीतिक कहानी के तौर पर देखा जा सकता है? 1978 के विमान अपहरण से लेकर 2006 की कश्मीर संवाद प्रक्रिया तक पूरा घटनाक्रम क्या है?
1978 में इंदिरा गांधी के लिए कैसे हुआ था विमान हाईजैक?
20 दिसंबर 1978 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-410 कलकत्ता से दिल्ली जा रही थी। विमान में भोलानाथ पांडेय और देवेंद्र पांडेय सवार थे। दोनों ने विमान को अपने कब्जे में लेकर उसे वाराणसी उतारने के लिए मजबूर किया। उस समय इंदिरा गांधी जनता पार्टी सरकार के दौर में गिरफ्तार थीं। दोनों ने उनकी रिहाई और संजय गांधी के खिलाफ मामलों को वापस लेने की मांग की थी। विमान में करीब 126 यात्री और छह क्रू सदस्य थे। दोनों के पास असली हथियार नहीं थे। उनके पास खिलौना पिस्तौल और क्रिकेट की गेंद थी, जिसे कथित तौर पर ग्रेनेड जैसा दिखाया गया था। कई घंटे चले घटनाक्रम के बाद दोनों ने आत्मसमर्पण कर दिया। उस समय दोनों ने खुद को यूथ कांग्रेस से जुड़ा बताया था, हालांकि तत्कालीन कांग्रेस नेताओं की ओर से इस संबद्धता से इनकार भी किया गया था।
Congress Hijacked Plane: विमान हाईजैक करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई?
दोनों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ। इस मामले का सबसे विवादित हिस्सा इसके बाद सामने आया। इंदिरा गांधी 1980 में दोबारा सत्ता में लौटीं। इसके बाद भोलानाथ पांडेय और देवेंद्र पांडेय के खिलाफ चल रही कार्रवाई समाप्त हुई और दोनों बाद में कांग्रेस के टिकट पर चुनावी राजनीति में आए। भोलानाथ पांडेय 1980 में उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे और बाद में फिर विधायक बने। देवेंद्र पांडेय भी कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने और उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में पद संभाला। यह घटनाक्रम इसलिए राजनीतिक बहस का विषय बना क्योंकि जिस विमान अपहरण के मामले में दोनों गिरफ्तार हुए थे, उसी के बाद दोनों का कांग्रेस में राजनीतिक करियर आगे बढ़ा।
क्या कांग्रेस ने ‘हाईजैक का इनाम’ दिया था?
यहीं तथ्य और राजनीतिक व्याख्या के बीच अंतर करना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विमान अपहरण के बाद दोनों गिरफ्तार हुए थे। बाद में मामला खत्म हुआ और दोनों कांग्रेस की राजनीति में आगे बढ़े। रिपोर्ट के मुताबिक, भोलानाथ पांडेय को कांग्रेस ने चुनावी टिकट दिया और वे विधायक बने। पार्टी में उन्हें बाद में संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी मिलीं। देवेंद्र पांडेय भी विधायक बने और उत्तर प्रदेश कांग्रेस में पदाधिकारी रहे। इसके आधार पर कांग्रेस आलोचक इसे ‘हाईजैक के बाद राजनीतिक इनाम’ के रूप में पेश करते हैं। यानी तथ्य यह है कि विमान अपहरण हुआ, दोनों गिरफ्तार हुए और बाद में दोनों कांग्रेस की राजनीति में पहुंचे। इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की राजनीतिक व्याख्या का अपने तरीके से करते रहे हैं।
Congress Hijacked Plane: अब 2006 के यासीन मलिक मामले को समझिए
यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी JKLF के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे मुलाकात की थी। यह मुलाकात उस दौर की कश्मीर नीति के संदर्भ में हुई, जब केंद्र सरकार कश्मीर मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक और अलगाववादी पक्षों से संवाद की कोशिश कर रही थी। इसलिए केवल प्रधानमंत्री और मलिक की मुलाकात की तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि सरकार उनके अलगाववादी विचारों का समर्थन कर रही थी, उचित नहीं होगा। उस दौर में सरकार की नीति में बातचीत और राजनीतिक संवाद को महत्व दिया जाता था।

फिर यासीन मलिक का नाम दोबारा क्यों आया?
सितंबर 2025 में यासीन मलिक ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में 2006 की घटनाओं को लेकर कई दावे किए। मलिक ने दावा किया कि 2006 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान उसने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद से मुलाकात की थी। उसके अनुसार यह मुलाकात उसकी निजी पहल नहीं थी, बल्कि भारतीय खुफिया अधिकारियों के कहने पर शांति प्रक्रिया के संदर्भ में हुई थी। मलिक ने आगे दावा किया कि पाकिस्तान से लौटने के बाद उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस बारे में जानकारी दी और प्रधानमंत्री ने उसके प्रयासों के लिए आभार जताया। मलिक के मुताबिक उस मुलाकात में तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन भी मौजूद थे। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये बातें यासीन मलिक के हलफनामे में किए गए दावे हैं।
Congress Hijacked Plane: यासीन मलिक के खिलाफ बाद में क्या हुआ?
2006 की बातचीत के वर्षों बाद यासीन मलिक की कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल गई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, मलिक को जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया। NIA ने कहा कि वह JKLF का प्रमुख था और आतंकवादी एवं अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े मामले में उसकी भूमिका सामने आई थी। मलिक ने 2022 में इस मामले में अपना अपराध स्वीकार किया था। इसी वजह से 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर बाद के वर्षों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी।
1978 और 2006 को एक साथ क्यों जोड़ा जाता है?
कांग्रेस के आलोचक इन दोनों घटनाओं को पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। उनका तर्क है कि 1978 में इंदिरा गांधी की रिहाई की मांग को लेकर विमान हाईजैक करने वाले दोनों व्यक्ति बाद में कांग्रेस की राजनीति में आगे बढ़े। दूसरी तरफ 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक से बातचीत की। इन दोनों घटनाओं को जोड़कर कांग्रेस की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए जाते हैं। लेकिन दोनों घटनाओं के संदर्भ अलग हैं। 1978 का मामला विमान अपहरण और आपराधिक कार्रवाई से जुड़ा था। वहीं 2006 की मुलाकात कश्मीर में संवाद और राजनीतिक प्रक्रिया के संदर्भ में हुई थी।
Congress Hijacked Plane: कांग्रेस के लिए यह मुद्दा राजनीतिक बहस क्यों बनता है?
विमान अपहरण के मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी गंभीर आपराधिक घटना में गिरफ्तार किए गए लोगों का बाद में राजनीतिक करियर कैसे आगे बढ़ा। दूसरी तरफ यासीन मलिक के मामले में सवाल यह उठाया जाता है कि जिस व्यक्ति की अलगाववादी राजनीति और बाद की आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में दोषसिद्धि हुई, उससे तत्कालीन सरकार ने संवाद क्यों किया। इन सवालों के जवाब उस समय की परिस्थितियों और सरकार की नीतियों के संदर्भ में अलग-अलग दिए जाते रहे हैं।
इंदिरा गांधी से मनमोहन सिंह तक क्या कोई सीधा कनेक्शन है?
राजनीतिक बहस में बनाया जाता है कि कनेक्शन में एक तरफ 1978 में इंदिरा गांधी की रिहाई के लिए विमान हाईजैक करने वाले दो लोगों का बाद में कांग्रेस की राजनीति में पहुंचना और दूसरी तरफ 2006 में कश्मीर संवाद के दौरान मनमोहन सिंह की यासीन मलिक से मुलाकात। यानी दोनों घटनाओं को कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक तर्क में एक साथ रखा जा सकता है, लेकिन इतिहास की दृष्टि से इन्हें एक ही घटना या एक ही नीति का हिस्सा कहना उचित नहीं होगा।
Congress Hijacked Plane: पूरी कहानी क्या है?
1978 की घटना में भोलानाथ पांडेय और देवेंद्र पांडेय ने इंदिरा गांधी की रिहाई की मांग को लेकर इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-410 को हाईजैक किया। बाद में दोनों कांग्रेस की राजनीति में पहुंचे और विधायक बने। भोलानाथ पांडेय को कांग्रेस संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। 2006 में मनमोहन सिंह ने यासीन मलिक से मुलाकात की। बाद में मलिक ने अपने हलफनामे में हाफिज सईद से मुलाकात और मनमोहन सिंह द्वारा अपने प्रयासों के लिए आभार जताने का दावा किया। यह दावा स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है।
इसलिए 1978 से 2006 तक की इस कहानी में सबसे बड़ा सवाल केवल कांग्रेस पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि घटनाओं के संदर्भ को समझने का है। एक तरफ विमान अपहरण जैसी आपराधिक घटना के बाद आरोपियों का राजनीतिक जीवन आगे बढ़ा, दूसरी तरफ कश्मीर नीति के तहत अलगाववादी नेताओं से संवाद किया गया।
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