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1 नवंबर के जख्म आज भी ताजा हैं, लेकिन कांग्रेस ने उसी दिन महारैली का आयोजन किया

Congress Mega Rally:

Congress Mega Rally: 1 नवंबर 1984, यह समय कांग्रेस को हमेशा याद रहेगा। यह दौर सिख-विरोधी दंगों का था। यह दिन भारत के इतिहास के सबसे दुखद दिनों में से एक था। इस दिन दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में सिख समुदाय के लोगों की क्रूरता से हत्या की गई थी। लेकिन इसी दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन करने जा रहे हैं। बीजेपी ने अपने एक ट्वीट में कांग्रेस के इस फैसले पर आक्रोश जताया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या कांग्रेस अब इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि उसे सिख समुदाय का दर्द भी नजर नहीं आता? क्या यह कांग्रेस की नई पॉलिटिक्स का हिस्सा है?

Congress Mega Rally: बीजेपी- “यह तारीख का चयन नहीं, कांग्रेस की संवेदनहीनता का प्रमाण है”

1 नवंबर 1984 का दिन भारत के इतिहास के सबसे दुखद दिनों में से एक है। इस दिन पूरे भारत में करीब 3,325 लोग मारे गए थे। इस आंकड़े में से 2,733 मौतें अकेले दिल्ली में हुई थीं। वहीं, 31 अक्टूबर 1984 यानी इस हिंसा से एक दिन पहले प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

आगे बीजेपी कहती है, “यह समझ नहीं आता कि कांग्रेस करना क्या चाहती है। इस दिन हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। वहीं, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लेकिन वोट चोरी और SIR पर झूठ फैलाने वाली कांग्रेस को पीड़ितों का दुख दिखाई नहीं देता। यह तारीख का चयन नहीं, कांग्रेस की संवेदनहीनता का प्रमाण है।”

Congress Mega Rally: बीजेपी- “सिख समुदाय यह दिन नहीं भुला पाएंगे”

इंदिरा गांधी की मृत्यु कैसे हुई थी?

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या उनके ही दो सुरक्षा कर्मियों, बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने की थी। उस समय बेअंत सिंह दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर और सतवंत सिंह कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे। दोनों प्रधानमंत्री की सुरक्षा में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।

31 अक्टूबर 1984 की सुबह करीब 9:10 बजे इंदिरा गांधी अपने सरकारी आवास से निकलकर एक विदेशी टेलीविजन टीम को इंटरव्यू देने के लिए जा रही थीं। इसी दौरान, जब वह अपने आवास परिसर में बने रास्ते से गुजर रही थीं, तब बेअंत सिंह ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से उन पर गोलियां चलाईं। इसके बाद सतवंत सिंह ने अपनी कार्बाइन से उन पर गोलीबारी की। गंभीर रूप से घायल इंदिरा गांधी को तत्काल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ले जाया गया, जहां उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

इंदिरा गांधी की हत्या के पीछे ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर उपजा आक्रोश एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। जून 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई से बेअंत सिंह और सतवंत सिंह नाराज थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी इस कार्रवाई के प्रति उनकी नाराजगी और हत्या की साजिश से जुड़े तथ्यों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस हत्या के लिए जिम्मेदार वे व्यक्ति थे, जिन्होंने इसमें भाग लिया था, न कि पूरा सिख समुदाय।

ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था?

ऑपरेशन ब्लू स्टार जून 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के आदेश पर भारतीय सेना द्वारा अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में की गई सैन्य कार्रवाई थी। उस समय पंजाब में उग्रवाद बढ़ रहा था। जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थक स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे। सरकार का उद्देश्य परिसर में मौजूद सशस्त्र उग्रवादियों को बाहर निकालना था।

जून 1984 में भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में प्रवेश कर कार्रवाई की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और सिख धर्म के पवित्र स्थल परिसर में स्थित अकाल तख्त को भी भारी नुकसान पहुंचा। इस घटना से सिख समुदाय के एक बड़े हिस्से की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद पंजाब की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बीच सीधा ऐतिहासिक संबंध उनकी पृष्ठभूमि और हत्या के आरोपियों की नाराजगी से जुड़ा था। इसी कार्रवाई के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ बदले की भावना विकसित होने की बात जांच और अदालती रिकॉर्ड में सामने आई। हालांकि, ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उपजे आक्रोश को किसी भी तरह निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा का औचित्य नहीं माना जा सकता। 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 नवंबर 1984 से दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर हिंसा की गई, जो भारतीय इतिहास का एक बेहद दुखद अध्याय बन गया।

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