Connaught Place Protest: देश में एक ओर त्योहारों का दौर चल रहा है। नवरात्रि विदाई की ओर है, तो वहीं दशहरा और दिवाली चौखट पर दस्तक देने को तैयार हैं। अश्विन और कार्तिक मास हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं। इन महीनों में आने वाले त्योहार केवल आस्था और परंपरा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि समाज में उत्साह, मेल-मिलाप और खुशियों का माहौल भी बनाते हैं। बाजारों में रौनक बढ़ती है, लोग अपने घरों को सजाते हैं और परिवार के साथ त्योहार मनाने की तैयारियों में जुट जाते हैं। लेकिन इस उत्सवी माहौल के बीच देश एक ऐसे आंदोलन से भी गुजर रहा है, जिसकी दिशा और उद्देश्य पर अब कई सवाल उठ रहे हैं। सुबह से शाम तक चलने वाले विरोध-प्रदर्शनों में कभी किसी के इस्तीफे की मांग सुनाई देती है, तो कभी किसी दूसरे को हटाने की। सवाल यह है कि क्या किसी आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध करना और इस्तीफे मांगना भर रह गया है? क्या जनता से जुड़े मुद्दों, उनकी समस्याओं और उनके समाधान पर भी उतनी ही गंभीरता से बात हो रही है?
लेकिन सबसे बड़ी बात जो जानना जरूरी है वह यह है कि इन प्रदर्शनों का कारोबार, ग्राहकों की आवाजाही और आम लोगों की दिनचर्या पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी पड़ताल के लिए खबर इंडिया की टीम दिल्ली के कनॉट प्लेस पहुंची। खबर इंडिया के संस्थापक सुशील चौधरी ने मौके पर पहुंचकर जमीनी स्थिति जानने की कोशिश की।
Connaught Place Protest: पत्रकार प्रशांत भूषण ने आंदोलन पर उठाए सवाल-
इस मुद्दे पर पत्रकार प्रशांत भूषण से बातचीत की गई। उन्होंने आंदोलन के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह देश में अराजकता फैलाने और भारत को बांग्लादेश बनाने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे भयभीत हो जाएं। भूषण ने कहा कि आंदोलन करने वाले लोग कुंठित मानसिकता से ग्रस्त हैं और उनका मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाना है। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बहाना नजर आता है। जेपी आंदोलन और अन्ना हजारे के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले हुए आंदोलनों में उन्हें इस तरह का मंजर देखने को नहीं मिला, जहां पुलिस को इस तरह परेशान किया गया हो।
Connaught Place Protest: तिरंगा यात्रा में भी बेनकाब हुए आंदोलनजीवी-
सीजीपी की तिरंगा यात्रा के दौरान कुछ लोगों के पास तिरंगे नहीं थे। कई लोग तिरंगे को हाथ में लेकर के हूं हल्ला करते भी नजर आए। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। उनसे पहले पार्टी के अन्य नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिया गया था।
कनॉट प्लेस के कारोबार पर क्या असर-
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में कनॉट प्लेस की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही का भी जायजा लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़ी दुकानों पर भी अपेक्षित भीड़ नजर नहीं आई। कुछ दुकानदारों की दुकानों का मासिक किराया पांच से छह लाख रुपये तक बताया गया।रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया कि यदि त्योहारों के दौरान भी बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम रहती है, तो इसका असर व्यापारियों की कमाई पर पड़ सकता है। कारोबार में कमी के पीछे का बड़ा कारण आंदोलन ही है।
क्या हिंदू धर्म के त्योहारों की रौनक खत्म करने की कोशिश हो रही है-
त्योहारों के दौरान बाजारों में आम तौर पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ती है। देश में जहां आंदोलन हो रहे है वहां व्यापारियों और ग्राहकों का यही हाल है ऐसे में कनॉट प्लेस में कम आवाजाही की स्थिति व्यापारियों के लिए चिंता का विषय हो सकती है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या हिंदू धर्म के त्योहारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है?
यह भी पढ़े- दिल्ली दंगा केस में आप नेता ताहिर हुसैन को सजा, कोर्ट ने उनकी भूमिका को गंभीर क्यों माना?








