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200 करोड़ की रंगदारी मामले में सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगी को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत

Delhi High Court

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने 200 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी से जुड़े चर्चित मामले में ठग सुकेश चंद्रशेखर के करीबी सहयोगी और वकील बी. मोहनराज को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी लगभग चार साल दस महीने से न्यायिक हिरासत में है और मामले की जटिलता को देखते हुए मुकदमा जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। ऐसे में उसे अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जमानत तक सीमित है और इससे मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

लंबी न्यायिक हिरासत को आधार बनाकर मिली राहत

जस्टिस प्रतीक जालान की एकल पीठ ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में 24 आरोपी, 403 सरकारी गवाह और 10 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट है। ऐसे में मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना बेहद कम है। अदालत ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है और लंबे समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रखना उचित नहीं होगा, भले ही मामला महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज हो।

Delhi High Court: जमानत के साथ लगाई गईं सख्त शर्तें

हाईकोर्ट ने बी. मोहनराज को 2.5 लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने, प्रत्येक सुनवाई पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहने तथा किसी भी गवाह को प्रभावित न करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि इन शर्तों का पालन करना जमानत की अनिवार्य शर्त होगी।

217 करोड़ की कथित रंगदारी से जुड़ा है मामला

यह मामला अगस्त 2021 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि सुकेश चंद्रशेखर और उसके सहयोगियों ने एक कारोबारी की पत्नी से उसके पति को कानूनी राहत दिलाने का झांसा देकर करीब 217 करोड़ रुपये की रंगदारी वसूली थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि मोहनराज ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को तीसरे पक्ष के माध्यम से चेन्नई में लग्जरी कारों और अचल संपत्तियों में निवेश कराने में मदद की थी। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पहले उनकी जमानत खारिज की जा चुकी थी, लेकिन लंबे समय तक हिरासत और मुकदमे में संभावित देरी को देखते हुए इस बार राहत दी गई है। वहीं, इस मामले में सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉल की जमानत याचिका हाल ही में हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी, जबकि उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।

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