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नरेला की फैक्ट्री में भीषण आग, दमकल की टीम ने संभाला मोर्चा; दिल्ली में आखिर कब थमेगा आग का सिलसिला?

NEW Delhi : राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अब नरेला इंडस्ट्रियल एरिया की एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दमकल विभाग को सुबह करीब 9:05 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद 10 दमकल गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और मामले की जांच की जा रही है।
नरेला की फैक्ट्री में कैसे लगी आग?
गुरुवार सुबह नरेला के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक फैक्ट्री में अचानक आग लग गई। आग की सूचना मिलते ही दिल्ली दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और दमकल की 10 गाड़ियों को मौके पर रवाना किया। दमकलकर्मी आग पर काबू पाने और उसे आसपास की इमारतों तक फैलने से रोकने में जुटे रहे। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं है। घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी भी शुरुआती रिपोर्ट में सामने नहीं आई है। आग से हुए नुकसान का आकलन और घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
NEW Delhi : दिल्ली में आए दिन आग की घटनाएं, आखिर जिम्मेदार कौन?
नरेला की यह घटना एक बार फिर राजधानी की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। दिल्ली में फैक्ट्रियों, गोदामों, दुकानों और रिहायशी इमारतों में आग लगने की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। हर बड़ी घटना के बाद दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचती हैं, आग बुझाई जाती है और जांच की बात कही जाती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से कितनी तैयारी की जा रही है? क्या औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही फैक्ट्रियों में अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच होती है? क्या वहां आपातकालीन निकास के पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या फैक्ट्री संचालक सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन कर रहे हैं? इन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है।
फैक्ट्री मालिकों की लापरवाही पर क्यों नहीं होती सख्त कार्रवाई?
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर हर दिन अपनी रोजी-रोटी के लिए फैक्ट्रियों में पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी फैक्ट्री संचालकों और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की होती है।  फैक्ट्रियों में आग बुझाने वाले उपकरण, फायर अलार्म, आपातकालीन रास्ते और सुरक्षा से जुड़े दूसरे इंतजाम होना बेहद जरूरी है। अगर इन नियमों की अनदेखी होती है, तो छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे में बदल सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या संबंधित विभाग समय-समय पर फैक्ट्रियों का निरीक्षण करते हैं? अगर किसी फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कितनी सख्ती दिखाई जाती है? केवल हादसे के बाद जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हादसे से पहले लापरवाही रोकना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
NEW Delhi : हाल के हादसों ने बढ़ाई चिंता, मंगोलपुरी फैक्ट्री अग्निकांड में गई थीं 4 जानें
दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में 30 अक्टूबर को जूता फैक्ट्री में भीषण आग लगने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। इस घटना के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों और कथित लापरवाही को लेकर भी सवाल उठे। पुलिस ने मामले में जांच शुरू की और संबंधित एजेंसियों से सुरक्षा संबंधी खामियों की जानकारी मांगी। मंगोलपुरी की घटना के कुछ ही दिनों बाद नरेला की फैक्ट्री में आग लगने की खबर ने एक बार फिर औद्योगिक इलाकों की सुरक्षा को चर्चा में ला दिया है।
हादसे के बाद नहीं, पहले जागना होगा प्रशासन को
दिल्ली जैसे बड़े शहर में औद्योगिक इकाइयों की संख्या काफी है। यहां हजारों मजदूर फैक्ट्रियों और गोदामों में काम करते हैं। ऐसे में अग्नि सुरक्षा को केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं देखा जा सकता। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट कराए, नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर कार्रवाई करे और मजदूरों के लिए सुरक्षित निकास और आपातकालीन प्रशिक्षण सुनिश्चित करे। नरेला की फैक्ट्री में लगी आग ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा किया है कि क्या दिल्ली में आग लगने के बाद ही व्यवस्था हरकत में आएगी या फिर ऐसे हादसों को रोकने के लिए पहले से ठोस कदम उठाए जाएंगे? आखिर मजदूरों की जान और सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब कौन देगा?

 

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