Delhi O-Zone: राजधानी दिल्ली में यमुना किनारे बसे O-Zone क्षेत्र की कॉलोनियों को लेकर एक बार फिर चिंता का माहौल बन गया है। बताया जा रहा है कि इस इलाके की 91 से 94 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 15 लाख परिवारों के मकानों पर कभी भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) समय-समय पर इन इलाकों को लेकर अदालत का रुख करता रहा है। वहीं गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, सोनिया विहार, जगतपुर, वजीराबाद समेत कई क्षेत्रों में O-Zone के बोर्ड लगाए जाने के बाद स्थानीय लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। लोगों को डर है कि कहीं उनके घरों पर बुलडोजर कार्रवाई न हो जाए।
AAP ने BJP सरकार को घेरा
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली और केंद्र की BJP सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। AAP ने मांग की है कि केंद्र सरकार संसद में विशेष कानून लाकर O-Zone की इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करे। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक संसद में कानून नहीं बनेगा, तब तक लाखों परिवारों के मन से बेघर होने का डर खत्म नहीं होगा। उनका दावा है कि इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को स्थायी राहत देने के लिए कानूनी व्यवस्था जरूरी है।
Delhi O-Zone: क्या है O-Zone?
O-Zone यानी यमुना नदी और उसके आसपास का वह क्षेत्र, जिसे पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के तहत वजीराबाद से ओखला तक लगभग 165 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को O-Zone श्रेणी में शामिल किया गया था। इस क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों और भूमि उपयोग को लेकर विशेष नियम लागू हैं। इन्हीं नियमों के कारण समय-समय पर यहां बनी कॉलोनियों को लेकर विवाद और कार्रवाई की आशंकाएं सामने आती रही हैं।
15 लाख परिवारों की बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनके पास बिजली-पानी के कनेक्शन हैं और उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर मकान बनाए हैं। ऐसे में यदि किसी प्रकार की तोड़फोड़ या हटाने की कार्रवाई होती है, तो लाखों परिवारों के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल O-Zone का मुद्दा केवल पर्यावरण और शहरी नियोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लाखों लोगों के भविष्य और राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। अब सबकी नजर सरकार और अदालतों के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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