Delhi Police: दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर अब नया खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ के बीच सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस के मुताबिक यह तैनाती जानबूझकर और रणनीति के तहत की गई थी। इन जवानों के प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने के वीडियो सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में रहा था। दिल्ली पुलिस के उपायुक्त सचिन शर्मा ने हलफनामे में बताया कि स्पेशल ब्रांच और क्राइम ब्रांच के जवानों को भीड़ में सादे कपड़ों में तैनात किया गया था। पुलिस ने इसे भीड़ नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इस तरह की तैनाती पहले भी की जाती रही है।
प्रदर्शन में करीब 200 लोग घायल होने का दावा
पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, जबकि लगभग 250 पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरत पड़ने पर लाठी का इस्तेमाल करना अपने आप में गलत नहीं है। प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद जवानों के लाठी चलाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसके बाद उनकी पहचान और भूमिका को लेकर सवाल उठे। इस मामले में मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी शिकायत की गई थी और याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
Delhi Police: कील लगी लाठी को लेकर पुलिस ने दी सफाई
प्रदर्शन में कथित तौर पर कील लगी लाठी के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस ने अपना पक्ष रखा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि केवल एक स्थान पर ऐसी लाठी देखी गई थी। पुलिस के मुताबिक यह डंडा प्रदर्शनकारियों के हाथ में था और संभव है कि उसे झंडे के साथ लाया गया हो।
भीड़ में सादे कपड़ों में पुलिस क्यों तैनात होती है?
पुलिस के अनुसार बड़े प्रदर्शनों के दौरान सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती का उद्देश्य भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखना और संभावित हिंसा की जानकारी जुटाना होता है। स्पेशल ब्रांच या स्थानीय खुफिया इकाई के जवान भीड़ का हिस्सा बनकर स्थिति का आकलन कर सकते हैं। इसके अलावा ऐसी तैनाती का उद्देश्य माहौल को उग्र होने से रोकना और जरूरत पड़ने पर पुलिस को समय रहते कार्रवाई के लिए सूचना उपलब्ध कराना भी होता है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में जवानों की मौजूदगी इसी रणनीति का हिस्सा थी।
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