Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता परिवर्तन यानी ‘रिजीम चेंज’ को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे आमने-सामने आ गए हैं। उद्धव ठाकरे ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया, तो फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत में सत्ता बदलने का रास्ता चुनाव से होकर गुजरता है। उन्होंने उद्धव ठाकरे को शिवसेना में हुए विभाजन की भी याद दिलाई। दोनों नेताओं के बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है।
Devendra Fadnavis: उद्धव ठाकरे बोले- हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं-
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव के जरिए अपनी बात रखने का अधिकार और विरोध प्रदर्शन करने की आजादी छीनी जाती है, तो सरकार को सत्ता से हटाने के लिए संघर्ष करना जरूरी हो जाता है। ठाकरे ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं के सिर फोड़े गए और महिलाओं तथा लड़कियों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने बाल खींचने और कपड़े फाड़ने जैसे आरोप भी लगाए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने से रोका जाता है, तो ऐसी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए आवाज उठाना जरूरी है।
Devendra Fadnavis: फडणवीस का पलटवार- अपनी शिवसेना का रिजीम चेंज नहीं रोक पाए-
उद्धव ठाकरे के बयान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे पहले अपनी पार्टी में हुए सत्ता परिवर्तन को नहीं रोक पाए और अब किस तरह के सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं, यह समझ से परे है। फडणवीस ने शिवसेना में हुए विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि जब उद्धव ठाकरे की पार्टी ने हिंदुत्व और बालासाहेब ठाकरे के विचारों को छोड़ दिया, तब उन विचारों पर चलने वाले लोगों ने अपनी अलग शिवसेना बना ली। मुख्यमंत्री के इस बयान के जरिए शिवसेना के विभाजन और दोनों गुटों के बीच वैचारिक मतभेदों का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
‘रिजीम चेंज’ के लिए चुनाव जीतना होगा: फडणवीस-
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर विपक्ष सत्ता परिवर्तन चाहता है, तो उसे चुनाव मैदान में उतरकर जनता का विश्वास जीतना होगा। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और इसके लिए चुनावी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। फडणवीस ने कहा कि संविधान के तहत फैसले संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से लिए जाते हैं, सड़क पर नहीं। उन्होंने विपक्ष को चुनाव के जरिए अपनी ताकत साबित करने की चुनौती भी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए विश्वास जताया कि उनकी सरकार चुनाव के जरिए फिर सत्ता में आएगी।
नेपाल-बांग्लादेश का जिक्र कर क्या बोले फडणवीस-
अपने बयान में फडणवीस ने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों में हुए सत्ता परिवर्तन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की ताकत के कारण यहां सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव से होकर गुजरता है। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को नकारकर सत्ता बदलने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। फडणवीस के इस बयान को उद्धव ठाकरे की सत्ता परिवर्तन की मांग के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच विवाद का केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सत्ता बदलने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर है।
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर आमने-सामने ठाकरे और फडणवीस-
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच बयानबाजी ने महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन की जरूरत पर जोर दे रहे हैं, वहीं फडणवीस चुनाव और संविधान को सत्ता बदलने का लोकतांत्रिक रास्ता बता रहे हैं। इस राजनीतिक टकराव में शिवसेना का विभाजन, हिंदुत्व की विचारधारा और बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। अब देखना होगा कि दोनों नेताओं के बीच यह बयानबाजी महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या रुख लेती है।
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