Manoj Muntashir: रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ की रिलीज से ठीक पहले गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला एक नए बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारत में दो तरह की परंपराओं का जिक्र किया। इनमें एक को उन्होंने ‘भारतीय परंपरा’ और दूसरी को ‘बाबरी परंपरा’ बताया। इस दौरान उन्होंने रामायण के प्रसंगों की तुलना मुगल शासक शाहजहां और उनके बेटों के बीच हुए सत्ता संघर्ष से की। वीडियो सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके बयान की आलोचना की और उन्हें ट्रोल किया।
मनोज मुंतशिर ने वीडियो में क्या कहा?
मनोज मुंतशिर ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने कहा कि बच्चों को रामायण की कहानी बार-बार सुनाना जरूरी है, ताकि वे उसके प्रसंगों और पात्रों को समझ सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों को विकल्प और तर्क दिए जाने चाहिए, जिससे वे खुद निर्णय ले सकें। इसी संदर्भ में उन्होंने देश में दो परंपराओं की बात रखी।
Manoj Muntashir: राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का दिया उदाहरण
मनोज ने भारतीय परंपरा समझाने के लिए राजा दशरथ के चार बेटों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि राम को वनवास मिलने पर लक्ष्मण उनके साथ वन चले गए, शत्रुघ्न ने उनके लौटने तक उपवास रखने का संकल्प लिया और भरत उन्हें वापस लाने पहुंचे। राम के अयोध्या नहीं लौटने पर भरत उनकी खड़ाऊ लेकर वापस आए और उसे राजसिंहासन पर रखा।
शाहजहां और औरंगजेब का भी किया जिक्र
इसके बाद मनोज मुंतशिर ने मुगल बादशाह शाहजहां के चार बेटों दारा शिकोह, शुजा, मुराद और औरंगजेब का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए औरंगजेब ने अपने भाइयों की हत्या करवाई और पिता शाहजहां को कैद कर दिया। उन्होंने दारा शिकोह के कटे हुए सिर को थाली में रखकर शाहजहां के सामने पेश किए जाने का भी जिक्र किया। इसके बाद उन्होंने राम की खड़ाऊ और कटे हुए सिर वाली थाली का उदाहरण देकर बच्चों से पूछा कि वे किस परंपरा को चुनना चाहेंगे।
Manoj Muntashir: रामायण को पूरी मानवता से जोड़ा
अपने वीडियो में मनोज ने यह भी कहा कि राम और रामायण को केवल हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से देखना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक, रामायण सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण का महत्व किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर क्यों ट्रोल हुए मनोज?
वीडियो सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने रामायण के त्रेता युग की तुलना मुगलकालीन घटनाओं से करने पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने कहा कि दोनों अलग-अलग ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भ हैं, इसलिए ऐसी तुलना उचित नहीं है। वहीं कई यूजर्स ने मनोज मुंतशिर को उनकी फिल्म ‘आदिपुरुष’ की याद दिलाई। इस फिल्म के संवादों और प्रस्तुति को लेकर 2023 में विवाद हुआ था। मनोज मुंतशिर इस फिल्म के संवाद लेखक थे और बाद में उन्होंने फिल्म की गलतियों के लिए माफी मांगने की बात भी कही थी।








