Diwali Bail: दिवाली के अवसर पर गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद 33 कैदियों को पैरोल मंजूर की गई है। इस फैसले के तहत 26 पुरुष और 7 महिला कैदियों को त्योहार के दौरान अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। जेल प्रशासन ने कैदियों के कल्याण और उनके पारिवारिक जीवन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। इसके अलावा जेल में अच्छे व्यवहार वाले अन्य 80 कैदियों को भी 14 दिन की पैरोल देने का प्रावधान किया गया है। गुजरात सरकार की ओर से दिवाली पर पात्र कैदियों को अस्थायी रिहाई देने की व्यवस्था पहले से चली आ रही है।
33 कैदियों में 26 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल
साबरमती सेंट्रल जेल से पैरोल पाने वाले 33 कैदियों में 26 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल हैं। इस फैसले का उद्देश्य पात्र कैदियों को दिवाली के अवसर पर अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने का अवसर देना है। जेल प्रशासन की ओर से कैदियों की पात्रता और निर्धारित नियमों के आधार पर पैरोल मंजूर की गई है।
Diwali Bail: गुजरात में 2003 से चली आ रही है परंपरा
गुजरात सरकार वर्ष 2003 से दिवाली के अवसर पर पात्र कैदियों को पैरोल देने की व्यवस्था लागू कर रही है। इसके तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र पुरुष कैदियों और महिला कैदियों को 15 दिन की पैरोल दी जाती है। इस साल भी राज्य सरकार ने अलग-अलग जेलों में बंद कुल 143 पात्र कैदियों को 15 दिन की पैरोल देने की मंजूरी दी है। इनमें 103 पुरुष और 40 महिला कैदी शामिल हैं। यह रिहाई 6 नवंबर 2026 से शुरू हुई है।
किन कैदियों को मिलती है दिवाली पैरोल?
इस व्यवस्था का लाभ सभी कैदियों को नहीं मिलता। इसके लिए उम्र, लिंग, अपराध की प्रकृति और पात्रता से जुड़े नियम निर्धारित हैं। सामान्य तौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र पुरुष कैदी और पात्र महिला कैदी इस सुविधा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कैदी के आचरण और संबंधित नियमों के आधार पर भी निर्णय लिया जाता है।
Diwali Bail: गंभीर अपराधों के दोषियों को नहीं मिलती राहत
गुजरात जेल विभाग के पुलिस महानिदेशक केएलएन राव के मुताबिक, गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को दिवाली पैरोल का लाभ नहीं दिया जाता। इनमें दुष्कर्म, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी और जबरन वसूली जैसे अपराधों में दोषी कैदी शामिल हैं। NDPS, TADA और POTA के तहत सजा काट रहे कैदियों को भी इस सुविधा से बाहर रखा गया है। इसके अलावा आतंकवादी गतिविधियों, एक से अधिक अपराधों और राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल कैदियों को भी पात्र नहीं माना जाता।
पैरोल का उद्देश्य क्या है?
पैरोल कैदी को निर्धारित अवधि के लिए जेल से अस्थायी रूप से बाहर रहने की अनुमति होती है। इसका उद्देश्य विशेष परिस्थितियों में कैदी को परिवार और सामाजिक जीवन से जुड़ने का अवसर देना है। दिवाली पैरोल को गुजरात सरकार की कैदी कल्याण और जेल सुधार पहल का हिस्सा माना गया है। पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद कैदी को निर्धारित समय पर जेल में वापस लौटना होता है। नियमों का उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।








