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चुनावी मामलों में देरी लोकतंत्र के लिए खतरा, मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

Election Petition Delay: मद्रास हाईकोर्ट ने चुनावी याचिकाओं के निपटारे में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि समय पर न्याय न मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सकता है। अदालत ने 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़े एक विवाद पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी मामलों का वर्षों तक लंबित रहना मतदाताओं के अधिकारों और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालता है।

छह साल तक लंबित रहा चुनावी विवाद

यह मामला तमिलनाडु की राधापुरम विधानसभा सीट के 2016 चुनाव से जुड़ा था। उस चुनाव में एक उम्मीदवार ने केवल 49 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। चुनाव परिणाम के बाद पराजित प्रत्याशी ने अदालत का रुख करते हुए आरोप लगाया कि उनके पक्ष में पड़े कई वैध डाक मतपत्रों को गलत तरीके से खारिज कर दिया गया था। साथ ही मतगणना के कुछ चरणों में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया। वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने डाक मतपत्रों की दोबारा जांच और कुछ चरणों की पुनर्गणना का आदेश दिया था। हालांकि बाद में यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंच गया और वहां लगभग छह वर्षों तक लंबित रहा।

Election Petition Delay: उच्चतम न्यायालय की देरी पर अदालत ने जताई चिंता

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इतने लंबे समय तक मामला लंबित रहना चिंताजनक है। अदालत ने यह भी कहा कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने और दो चुनाव गुजर जाने के बाद विवाद का अंतिम निपटारा हुआ। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को अनिर्णीत छोड़ देने से चुनावी न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होती है। अदालत के अनुसार, चुनावी मामलों में समयबद्ध निर्णय लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

Election Petition Delay: पुनर्गणना में बदला चुनाव परिणाम

डाक मतपत्रों की दोबारा जांच के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे मतपत्र थे जो पहले गलत तरीके से अमान्य घोषित कर दिए गए थे। पुनर्गणना के बाद आंकड़े बदले और अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि वास्तविक विजेता वह उम्मीदवार था जिसने चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। अदालत ने चुनाव परिणाम को निरस्त करते हुए उन्हें संबंधित कार्यकाल के लिए विधिवत निर्वाचित प्रतिनिधि घोषित किया और आधिकारिक अभिलेखों में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए।

 लोकतंत्र की सेहत पर अदालत की चेतावनी

Election Petition Delay: फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि चुनावी याचिकाओं का शीघ्र निस्तारण केवल कानूनी आवश्यकता नहीं बल्कि लोकतांत्रिक दायित्व भी है। अदालत ने जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी विवाद वर्षों तक लंबित रहने से जनता का भरोसा कमजोर होता है। न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि चुनावी मामलों में देरी की प्रवृत्ति जारी रही और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान की रक्षा करना न्यायपालिका का दायित्व है और केवल समय बीत जाने के आधार पर वह अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकती।

 

Written by: Rashmi Sharma

 

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