RTI 21 Years: सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू होने के 21 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर जारी एक नई रिपोर्ट में देश के सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के सूचना आयोगों में करीब चार लाख मामले लंबित हैं। वहीं, कई आयोगों में अपील और शिकायतों के निपटारे में एक साल से भी अधिक समय लगने का अनुमान है।
RTI 21 Years: 14 सूचना आयोगों में एक साल से ज्यादा की प्रतीक्षा-
सतर्क नागरिक संगठन की ओर से तैयार ‘रिपोर्ट कार्ड ऑन द परफॉर्मेंस ऑफ इन्फॉर्मेशन कमिशन्स इन इंडिया 2025-26’ में सूचना आयोगों के कामकाज का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 14 सूचना आयोगों में किसी मामले के निपटारे के लिए अनुमानित प्रतीक्षा अवधि एक साल से अधिक है। इससे आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाले नागरिकों को समय पर जवाब मिलने में देरी हो सकती है।
RTI 21 Years: तीन आयोगों में मामले निपटाने में लग सकते हैं 15 साल से ज्यादा-
रिपोर्ट में सूचना आयोगों में लंबित मामलों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। इसके मुताबिक, तीन सूचना आयोग ऐसे हैं, जहां मौजूदा लंबित मामलों के आधार पर किसी अपील या शिकायत का निपटारा करने में 15 साल से भी अधिक समय लग सकता है। मामलों के निपटारे में इतनी लंबी प्रतीक्षा अवधि सूचना के अधिकार के प्रभावी इस्तेमाल और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करती है।
आरटीआई कानून के 21 साल पूरे-
12 अक्टूबर को भारत में सूचना का अधिकार कानून लागू होने के 21 साल पूरे हुए। यह कानून नागरिकों को सरकारी सूचनाएं हासिल करने का अधिकार देता है। इसके जरिए लोग सार्वजनिक संस्थाओं के कामकाज से जुड़ी जानकारी मांग सकते हैं और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने में भूमिका निभा सकते हैं। आरटीआई कानून को पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
एसआईआर जैसे मुद्दों पर भी आरटीआई का इस्तेमाल-
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के वर्षों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे मुद्दों पर जानकारी हासिल करने के लिए भी आरटीआई का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे मामलों में आरटीआई नागरिकों को सार्वजनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर देता है। हालांकि, सूचना आयोगों में बड़ी संख्या में लंबित मामलों और निपटारे में देरी के कारण इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
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