Evening wind: तेज़ गर्मी के दिनों में अचानक शाम होते ही आसमान में धूल का बवंडर छा जाता है। कभी आपने गौर किया है कि सुबह के समय ऐसी आंधी अमूमन देखने को नहीं मिलती? आख़िर आंधी और शाम का यह क्या समीकरण है, इसे समझना दिलचस्प है। इसके पीछे का विज्ञान सूरज, धरती और हवा के बीच होने वाली एक दैनिक प्रक्रिया में छिपा है।
धरातल का ताप और हवा का चक्र
दिन की शुरुआत में धरती का तापमान कम होता है, लेकिन जैसे-जैसे सूरज ऊपर आता है, जमीन गर्म होने लगती है। जब दोपहर तक जमीन बहुत अधिक गर्म हो जाती है, तो उसके संपर्क में आने वाली हवा भी गर्म होकर तेजी से ऊपर उठने लगती है। इससे सतह के पास एक निम्न वायुदाब (low-pressure) का क्षेत्र बन जाता है। इस खाली जगह को भरने के लिए आसपास की ठंडी हवा तेजी से दौड़ती है। सतह से टकराकर हवा की यह तेज गति अपने साथ धूल और मिट्टी के कणों को उठा लेती है, जिसे हम आंधी कहते हैं। सुबह के समय धरती इतनी गर्म नहीं होती कि ऐसी स्थितियां पैदा कर सके, इसलिए आंधी के लिए शाम का समय अनुकूल होता है।
Evening wind: उत्तर भारत और रेगिस्तानी प्रभाव
भारत के उत्तरी हिस्सों में धूल भरी आंधी के पीछे थार मरुस्थल की बड़ी भूमिका है। गर्मियों में जब राजस्थान की रेत अत्यधिक तपने लगती है, तो वहां से गर्म हवाएं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों (हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, यूपी) की ओर रुख करती हैं। रास्ते भर यह हवा अपने साथ धूल के महीन कणों को उड़ाती चलती है, जिस कारण यहाँ की आंधी का रंग गहरा और प्रभाव अधिक होता है।
आंधी और चक्रवात में अंतर
Evening wind: अक्सर लोग धूल भरी आंधी और चक्रवात को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। धूल भरी आंधी स्थानीय स्तर पर गर्मी के कारण बनती है। वहीं, चक्रवात का जन्म समंदर की नमी और वायुमंडलीय दबाव में बड़े बदलावों के कारण होता है। चक्रवात हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आते हैं, इसलिए वे दिन के किसी भी समय आ सकते हैं। लेकिन साधारण आंधी के लिए दिनभर की गर्मी का संचय होना अनिवार्य है। आसान शब्दों में कहें तो, शाम को चलने वाली यह आंधी दिनभर के तापमान का परिणाम है। सूरज की गर्मी से जमीन का तपना, हवा का ऊपर उठना और फिर ठंडी हवाओं का उस जगह को भरने के लिए दौड़ना, यही वह चक्र है जो शाम को धूल भरी आंधी के रूप में हमारे सामने आता है।
Written by: Mansi Sharma
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