Gehu khareedi: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की शुरुआत में हुई देरी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस फैसले के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
खरीदी में देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें
राज्य में इस वर्ष गेहूं खरीदी 9 अप्रैल से शुरू हुई है, जबकि पिछले साल यह प्रक्रिया मार्च में ही शुरू हो गई थी। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, इस देरी का सबसे अधिक असर छोटे किसानों पर पड़ा है, जिनके पास भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती। उन्होंने कहा कि मजबूरी में किसानों को अपना अनाज कम दाम पर बेचना पड़ा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ।
Gehu khareedi: बिचौलियों को लाभ मिलने का आरोप
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का लाभ किसानों के बजाय बिचौलियों और एजेंटों को मिल रहा है। उनके अनुसार, प्रति क्विंटल लगभग 400 रुपये का फायदा किसानों की जगह दलालों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने इसे कमीशनखोरी का मामला बताते हुए कहा कि खरीदी प्रक्रिया में अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और खराब हो रही है।
Gehu khareedi: यूसीसी पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने समान नागरिक संहिता को लेकर भी राज्य सरकार से स्पष्टता मांगी। उन्होंने कहा कि यदि इस कानून में दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों, परंपराओं और रीति-रिवाजों की अनदेखी की जाती है, तो यह अन्याय होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस मुद्दे पर मजबूती से विरोध करेगी।
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