Heatwave Safety Tips: देश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही हीटवेव यानी लू का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को जल्दी नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे वे लू की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा खतरा क्यों?
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों में लू लगने का जोखिम सबसे अधिक होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि उम्र और शारीरिक स्थिति के चलते उनका शरीर गर्मी को संतुलित करने में सक्षम नहीं होता। इसी वजह से इनमें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इनकी विशेष देखभाल बेहद जरूरी है।

बच्चों और बुजुर्गों की शारीरिक संवेदनशीलता
बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी पसीना निकालने वाली ग्रंथियां भी कम सक्रिय होती हैं, जिससे वे गर्मी को आसानी से सहन नहीं कर पाते। वहीं बुजुर्गों में अक्सर दवाइयों के प्रभाव या कमजोर स्वास्थ्य के कारण शरीर गर्मी को संभाल नहीं पाता। इन दोनों कारणों से लू लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है, हालांकि सही सावधानियों से इस खतरे को कम किया जा सकता है।
लू लगने के मुख्य लक्षण
लू लगने पर शरीर में कई संकेत दिखाई देते हैं, जिनमें चक्कर आना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना, अचानक कमजोरी महसूस होना और मतली या उल्टी जैसा महसूस होना शामिल है। यदि बच्चों या बुजुर्गों में ऐसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत उन्हें ठंडी जगह पर ले जाएं और बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।
पानी और तरल पदार्थ का सेवन बढ़ाएं
गर्मी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को बार-बार पानी पिलाना बेहद जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ और ओआरएस घोल भी दिया जा सकता है, जो डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करते हैं और शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं।

धूप से बचाव करना जरूरी
बाहर निकलते समय सिर को ढकने के लिए टोपी, आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा और हल्के, ढीले सूती कपड़े पहनने चाहिए। इससे शरीर पर सीधी धूप का असर कम होता है और शरीर की गर्मी आसानी से नियंत्रित रहती है।
दोपहर की तेज धूप से दूरी रखें
दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा गर्म होता है, इसलिए इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखना चाहिए। इस समय बाहर निकलने से लू लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हल्का और संतुलित भोजन दें
गर्मी में भारी, तैलीय और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। इसके बजाय फल, सब्जियां, दही और हल्का खाना देना चाहिए, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है और आसानी से पच भी जाता है।

किन चीजों से परहेज करें
इस मौसम में शराब, ज्यादा कैफीन वाले पेय और बहुत ठंडे ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर के तापमान को असंतुलित कर सकते हैं। इसके स्थान पर प्राकृतिक शरबत और ताजे फलों के जूस बेहतर विकल्प होते हैं।
लगातार निगरानी रखना जरूरी
बच्चों और बुजुर्गों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। यदि वे थकान महसूस करें, कम सक्रिय दिखें या सामान्य से कम रुचि दिखाएं, तो उन्हें तुरंत आराम दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें।
गर्मी से बचाव के अतिरिक्त उपाय
स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार, घरों में पंखा, कूलर या एसी का उपयोग करना चाहिए और कमरे को ठंडा रखना जरूरी है। अगर किसी को लू लगने का शक हो, तो उसे तुरंत ठंडे पानी से नहलाएं, गीले कपड़े से शरीर पोछें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
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