IIT Bombay Student Death: देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला लेना लाखों छात्रों का सपना होता है। लेकिन IIT बॉम्बे के B.Tech छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को हुई मौत ने इन संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले पढ़ाई, परीक्षा, प्लेसमेंट और सामाजिक दबाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच IITs में कम से कम 65 छात्रों ने आत्महत्या की। साहिल के मामले में परीक्षा के दौरान कथित नकल और परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत प्रताड़ना के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।
IIT Bombay Student Death: परीक्षा के कुछ घंटे बाद हॉस्टल में मिला शव
22 वर्षीय साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में B.Tech के दूसरे वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर को उन्होंने सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मिड-सेमेस्टर परीक्षा दी थी। उसी दिन शाम करीब 6 बजे हॉस्टल के कमरे में उनका शव फंदे से लटका मिला।साहिल की मौत से पहले परीक्षा के दौरान हुई एक घटना सामने आई है। IIT बॉम्बे के अनुसार, साहिल को परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान का कहना है कि उन्होंने प्रश्नपत्र की फोटो ChatGPT पर अपलोड कर उसके जवाब हासिल करने की कोशिश की थी।
मोबाइल मिलने के बाद परीक्षा कक्ष से बाहर निकाला
IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम के मुताबिक, इन्विजिलेटर प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला ने साहिल को नकल करते पकड़े जाने के बाद संस्थान के नियमों के अनुसार शिकायत दर्ज कराई थी। परीक्षा में मौजूद कुछ छात्रों के अनुसार, मोबाइल फोन मिलने के बाद साहिल को परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया गया था और उन्हें आगे पेपर देने की अनुमति नहीं दी गई।कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि प्रोफेसर ने साहिल को एक साल के लिए सस्पेंड किए जाने की बात कही थी। हालांकि, IIT बॉम्बे का कहना है कि साहिल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। संस्थान के अनुसार, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष ने साहिल से बात कर उन्हें समझाया था कि परीक्षा में हुई इस घटना का उनके करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

IIT Bombay Student Death: परिवार ने लगाए जातिगत प्रताड़ना के आरोप
साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने प्रोफेसर दुल्ला और IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे पर जातिगत प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। FIR में उनके पिता ने आरोप लगाया है कि साहिल ने उन्हें बताया था कि पिछले 3 महीनों से डायरेक्टर केदारे के कहने पर प्रोफेसर दुल्ला उन्हें परेशान कर रहे थे।FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रोफेसर ने साहिल से उनकी जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और उन्हें परेशान करने तथा झूठे मामले में फंसाने की बात कही थी। साहिल की मां ने भी आरोप लगाया कि उनके बेटे को काफी परेशान किया गया और उसकी मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ SC-ST एक्ट और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। वहीं, 400 से ज्यादा छात्र मामले की जांच और संस्थान की व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। साहिल की मौत की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
IITs में आत्महत्याओं के आंकड़े क्या कहते हैं?
IITs में छात्रों की आत्महत्याओं को लेकर अलग-अलग समय पर सरकार और अन्य संगठनों की ओर से अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि 2014 से 2021 के बीच IITs में 34 छात्रों ने आत्महत्या की थी। मार्च 2023 में सरकार ने लोकसभा में बताया कि 2018 से 2023 के बीच IITs में 33 आत्महत्याएं हुईं। जुलाई 2023 में राज्यसभा में सरकार ने बताया कि 2018 के बाद से IITs में 39 छात्रों ने आत्महत्या की।ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के अनुसार, जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच IITs में कम से कम 65 छात्रों ने आत्महत्या की। ग्रुप के फाउंडर धीरज सिंह ने हाल ही में बताया कि RTI और मीडिया रिपोर्ट्स से मिले आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2021 से 18 सितंबर 2026 के बीच देश के 15 IIT कैंपस में 74 आत्महत्याएं और अन्य अप्राकृतिक मौतें दर्ज हुई हैं।
IIT Bombay Student Death: लाखों छात्रों में कुछ हजार सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा
देश में कुल 23 IIT हैं। इनमें अंडरग्रेजुएट स्तर पर 18,951 सीटें हैं। 2026 में इन सीटों के लिए 15 लाख से ज्यादा छात्रों ने JEE मेन्स की परीक्षा दी थी। इनमें से करीब 1.7 लाख छात्र JEE एडवांस तक पहुंचे।यानी JEE मेन्स देने वाले हर 100 छात्रों में करीब एक छात्र और JEE एडवांस देने वाले हर 10 छात्रों में करीब एक छात्र ही IIT तक पहुंच पाया। ऐसे में IIT में दाखिले के बाद छात्रों पर पढ़ाई और प्रदर्शन से जुड़ा दबाव क्यों बढ़ता है, इस पर भी चर्चा हो रही है।सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी नेशनल टास्क फोर्स, सरकार के बयानों और अलग-अलग छात्र संगठनों के सर्वे में पढ़ाई, प्लेसमेंट, सामाजिक भेदभाव, मानसिक स्वास्थ्य और रिसर्च से जुड़े दबाव जैसे कई कारणों पर चर्चा की गई है।
प्लेसमेंट और ग्रेडिंग का दबाव
नेशनल टास्क फोर्स के मुताबिक, बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के बाद छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ जाती है। इसमें रिलेटिव ग्रेडिंग और प्लेसमेंट के कड़े मानकों को भी एक कारण बताया गया है।रिलेटिव ग्रेडिंग में छात्र का ग्रेड केवल उसके खुद के नंबरों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि पूरी कक्षा के प्रदर्शन से भी जुड़ा होता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी छात्र को 90% अंक मिले हैं, लेकिन बाकी छात्रों का प्रदर्शन 95% है, तो उसे अपेक्षित टॉप ग्रेड नहीं मिल सकता।2024 में करीब 38% IIT ग्रेजुएट्स को प्लेसमेंट के जरिए नौकरी नहीं मिली। ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के फाउंडर धीरज सिंह का कहना है कि बड़ी संख्या में आत्महत्याएं परीक्षा और प्लेसमेंट के आसपास होती हैं।2023 में IIT बॉम्बे के छात्र दर्शन सोलंकी की मौत के बाद अलग-अलग IITs के छात्र संगठनों ने आंतरिक सर्वे किए थे। इनमें 61% छात्रों ने शैक्षणिक दबाव को आत्महत्या की वजह माना था, जबकि 12% छात्रों ने नौकरी की असुरक्षा को इसका कारण बताया।
IIT Bombay Student Death: IITs में SC-ST फैकल्टी की संख्या पर भी सवाल
नेशनल टास्क फोर्स के अनुसार, फैकल्टी और छात्र समुदाय की सामाजिक संरचना में बड़ा अंतर कैंपस के माहौल को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट में इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि अलग-अलग सामाजिक और जातीय पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को समान पृष्ठभूमि वाले पर्याप्त शिक्षक या मेंटर उपलब्ध नहीं हो सकते।2019 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया था कि IITs की 6,043 फैकल्टी में केवल 149 SC और 21 ST वर्ग से थे। यह कुल संख्या का करीब 2.8% था।
2024 में दाखिल एक RTI के अनुसार, 8 IITs में 80% से ज्यादा फैकल्टी सवर्ण वर्ग से हैं। IIT बॉम्बे और IIT खड़गपुर में यह संख्या 90% से ज्यादा बताई गई।कुछ छात्रों ने रैंकिंग को लेकर ताने, उनकी काबिलियत पर सवाल उठाने और उन्हें अलग-थलग किए जाने जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, कई फैकल्टी सदस्यों ने कहा है कि उनके कैंपस में जाति कोई मुद्दा नहीं है।दिसंबर 2021 में सरकार ने लोकसभा में बताया था कि 2014 से 2021 के बीच IITs में आत्महत्या करने वाले 34 छात्रों में 13 OBC और 5 SC वर्ग से थे। इस अवधि में ST वर्ग से कोई छात्र शामिल नहीं था।
मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर चिंता
नेशनल टास्क फोर्स ने पत्रकार स्नेहा बेल्सिन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पढ़ाई, नौकरी और सामाजिक अलगाव से जुड़ा दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उचित मदद नहीं मिलने की स्थिति में कुछ छात्रों के लिए नशा आत्म-उपचार का माध्यम बन सकता है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों में आत्महत्या के मामलों के बाद मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर एक कारण के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, काउंसलरों के अनुसार आत्महत्या करने वाले ज्यादातर छात्र काउंसलिंग सेवाओं तक पहुंचे ही नहीं थे।2025 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में कहा गया था कि IITs के करीब 90% फैकल्टी सदस्यों के पास संवेदनशील मामलों से निपटने के लिए जरूरी प्रशिक्षण नहीं है।

IIT Bombay Student Death: PhD छात्रों और सुपरवाइजर के बीच टकराव
IITs में केवल B.Tech छात्रों से जुड़े मामले ही चर्चा में नहीं रहे हैं। PhD और रिसर्च स्कॉलर्स के सामने भी अकादमिक दबाव से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।PhD छात्रों या रिसर्च स्कॉलर्स को 5 साल तक स्टाइपेंड या फेलोशिप मिलती है। इसी अवधि में उन्हें अपनी थीसिस पूरी करनी होती है और सुपरवाइजर से उसकी मंजूरी लेनी होती है। जिस प्रोफेसर के मार्गदर्शन में छात्र रिसर्च करता है, उसे सुपरवाइजर कहा जाता है।
2023 में IIT मद्रास के PhD छात्र सचिन कुमार जैन ने आत्महत्या की थी। इस मामले में उनके सुपरवाइजर प्रो. आशीष कुमार सेन को जिम्मेदार पाया गया और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।नेशनल टास्क फोर्स ने अपनी फील्ड विजिट के दौरान पाया कि कुछ PhD सुपरवाइजर लंबे समय तक अपने रिसर्च स्कॉलर्स की अनदेखी करते हैं, जबकि कुछ मामलों में छात्रों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण रखने की बात सामने आई।मार्च 2023 में लोकसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा था कि छात्रों की आत्महत्या के पीछे पढ़ाई का तनाव, निजी और पारिवारिक समस्याएं, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कारण और अन्य वजहें शामिल हो सकती हैं।
साहिल की मौत के बाद छात्रों ने रखीं 18 मांगें
साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT बॉम्बे कैंपस में छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने संस्थान प्रशासन के सामने 18 मांगों की सूची रखी। IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे ने इस सूची पर हस्ताक्षर किए हैं।इन मांगों में साहिल के शिक्षक और डीन प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला को सस्पेंड करने की मांग शामिल थी, जिन्हें डीन के पद से सस्पेंड किया जा चुका है। छात्रों ने मामले की जांच के लिए प्रोफेसरों, छात्र प्रतिनिधियों, बाहरी सदस्यों और छात्रों द्वारा सुझाए गए सदस्यों वाला पैनल बनाने की मांग भी रखी है।
छात्रों ने जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा डायरेक्टर, छात्र मामलों के डीन, एकेडमिक प्रोग्राम के डीन, HOD और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की मांग भी की गई है।छात्रों ने साहिल के बारे में जारी जानकारी को लेकर IIT बॉम्बे से माफी मांगने की मांग की थी। संस्थान की ओर से माफी मांगी जा चुकी है।
IIT Bombay Student Death: मानसिक स्वास्थ्य और जवाबदेही से जुड़ी मांगें
छात्रों की अन्य मांगों में प्रोफेसरों के लिए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट बनाना, प्रोफेसरों और कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण देना और छात्रों के लिए आमने-सामने काउंसलिंग की सुविधा बेहतर करना शामिल है।इसके अलावा डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी की प्रक्रिया में बदलाव, संस्थान की कमेटियों में छात्रों की भागीदारी और उनके अधिकार बढ़ाने की मांग की गई है।छात्रों ने कैंपस अस्पताल में 24 घंटे मनोचिकित्सक की ऑन-कॉल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही छात्र तनाव और परेशानी की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने की मांग की गई है। इसमें छात्र, शिक्षक और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को शामिल करने तथा हर सेमेस्टर रिपोर्ट जारी करने की बात कही गई है।
छात्रों ने कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य और मेडिकल सुविधाओं को बेहतर करने, प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन देने और मांगों को लागू करने की लिखित योजना 26 सितंबर तक देने की मांग की है।इसके अलावा मांगों की प्रगति की नियमित जानकारी देने और तय समय पर मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी सूची में शामिल है।









