IPS Divya Dev Story: करीब 35 वर्षों तक फाइलों में दबा रहा सरला भट्ट रेप और मर्डर केस एक बार फिर चर्चा में है। जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने इस मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। चार्जशीट में अलगाववादी नेता यासीन मलिक समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। इस पूरे मामले में 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी दिव्या देव की जांच अहम मानी जा रही है।
35 साल पुराने केस को मिली नई रफ्तार
SIA में एसपी रहते हुए आईपीएस दिव्या देव ने इस बहुचर्चित मामले की जांच को दोबारा शुरू कराया। वर्षों पुराने दस्तावेजों, गवाहों और फॉरेंसिक साक्ष्यों की नए सिरे से जांच की गई। इसके बाद एजेंसी ने विस्तृत चार्जशीट तैयार कर अदालत में पेश की।
IPS Divya Dev Story: कौन हैं IPS दिव्या देव?
दिव्या देव 2018 बैच की AGMUT कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। मूल रूप से तमिलनाडु की रहने वाली दिव्या ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा जॉइन की। जम्मू-कश्मीर में उन्होंने सोपोर की एसपी और बाद में स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) में एसपी के रूप में कार्य किया। वर्तमान में उनका तबादला पुदुचेरी हो चुका है।
IPS Divya Dev Story: क्या है सरला भट्ट हत्याकांड?
18 अप्रैल 1990 को आतंकवाद के चरम दौर में कश्मीरी पंडित समुदाय की सदस्य सरला भट्ट का कथित तौर पर श्रीनगर स्थित SKIMS अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि आतंकियों ने उनके साथ दुष्कर्म किया, बेरहमी से मारपीट की और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई सबसे चर्चित और दर्दनाक घटनाओं में गिनी जाती है।
IPS Divya Dev Story: 35 साल तक क्यों अटका रहा मामला?
आतंकवाद, खराब सुरक्षा हालात और गवाहों में भय के कारण मामले की जांच वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी। कई अहम गवाह सामने आने से डरते रहे, जिसके चलते केस लंबे समय तक लंबित रहा।
SIA ने दोबारा शुरू की जांच
जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के बाद SIA ने मामले की फाइल दोबारा खोली। जांच एजेंसी ने पुराने दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की दोबारा समीक्षा की। तकनीकी जांच और नए साक्ष्यों के आधार पर 737 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई।
दिव्या देव की रही अहम भूमिका
जांच के दौरान एसपी दिव्या देव ने पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी की। उन्होंने जांच टीम के साथ पुराने गवाहों तक पहुंच बनाई, वर्षों पुराने रिकॉर्ड जुटाए और तकनीकी व फॉरेंसिक साक्ष्यों को मजबूत किया। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने कई स्थानों का दौरा कर स्वयं जांच की प्रगति की समीक्षा भी की।
चार्जशीट में किन-किन को बनाया गया आरोपी?
चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन प्रमुख यासीन मलिक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा खुर्शीद अहमद चालकू, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम भी शामिल हैं। इनमें से तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि यासीन मलिक फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में हैं।
यासीन मलिक पर चलेगा एक और मुकदमा
चार्जशीट दाखिल होने के बाद यदि अदालत संज्ञान लेती है, तो यासीन मलिक के खिलाफ इस मामले में भी कानूनी कार्यवाही शुरू होगी। फिलहाल वह पहले से ही आतंकवाद से जुड़े दूसरे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
सरला भट्ट हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कश्मीर में आतंकवाद के दौर में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों का प्रतीक माना जाता है। 35 साल बाद चार्जशीट दाखिल होना इस बात का संकेत है कि लंबित मामलों में भी नई तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और पुनः जांच के जरिए न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
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