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Iran Crisis: ईरान संघर्ष में भीषण तबाही: शुरुआती हफ्तों में 3300 से ज्यादा मौतें, 43 लाख लोग हुए बेघर

Iran Crisis:
BAT YAM, ISRAEL - JUNE 15: Emergency and Rescue soldiers search for trapped people inside heavily damaged buildings after an overnight missiles strike from Iran on June 15, 2025 in Bat Yam, Israel. Iran launched a retaliatory missile strike on Israel starting late on June 13, after a series of Israeli airstrikes earlier in the day targeted Iranian military and nuclear sites, as well as top military officials. (Photo by Amir Levy/Getty Images)

Iran Crisis: मध्य पूर्व में जारी ईरान संघर्ष ने भयावह मानवीय संकट का रूप ले लिया है। संयुक्त एयर स्ट्राइक और जवाबी हमलों के बीच हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग बेघर हो गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस स्थिति को हाल के दशकों की सबसे गंभीर त्रासदियों में से एक बताया है और तत्काल शांति की अपील की है।

शुरुआती हफ्तों में भारी जनहानि

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, संघर्ष के शुरुआती हफ्तों में ही करीब 3,300 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। हवाई हमलों और मिसाइल हमलों के बीच आम नागरिक, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ी है और इसका असर आम जनजीवन पर कितना गंभीर पड़ा है।

Iran Crisis: लाखों लोग बेघर, स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई

संघर्ष के चलते 43 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। शरणार्थी शिविरों में जरूरत से ज्यादा लोग रह रहे हैं, जिससे हालात और भी खराब हो गए हैं। डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक हनान बाल्खी के अनुसार, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और चिकित्सा सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

स्वास्थ्य केंद्रों और बुनियादी ढांचे पर हमले

रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 100 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले किए गए हैं, जिससे राहत कार्यों में भारी बाधा आई है। औद्योगिक इकाइयों, आपातकालीन सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया गया है। इसके अलावा पर्यावरणीय खतरे भी बढ़ गए हैं, जिसमें जैविक और रेडियोएक्टिव जोखिम शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल संघर्ष विराम की अपील की है, साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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