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Passport नागरिकता का सबूत नहीं? MEA के बयान पर क्यों मचा विवाद, बॉम्बे HC के 13 साल पुराने फैसले से समझें सच

Passport : भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के एक बयान के बाद पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मंत्रालय ने कहा है कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट विदेश में किसी व्यक्ति की भारतीय राष्ट्रीयता दिखाता है, लेकिन इसे नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पासपोर्ट होने से किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकों के लिए मिलने वाली सरकारी योजनाओं और अन्य अधिकारों का लाभ नहीं मिल जाता।

इस बयान के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। गीतकार Javed Akhtar और नेता Aditya Thackeray समेत विपक्ष के कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस और दस्तावेजों की जांच का क्या महत्व है।

Passport नागरिकता का सबूत नहीं?

वहीं, सरकारी सूत्रों और कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कानून के अनुसार पासपोर्ट और नागरिकता दो अलग-अलग चीजें हैं। उनका कहना है कि Passports Act, 1967 और Citizenship Act, 1955 के तहत नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) या नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate) को ज्यादा मजबूत और कानूनी दस्तावेज माना जाता है।हालांकि, इस मुद्दे पर बहस जारी है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य हैं।विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और आलोचना देखने को मिल रही है। कई लोगों का कहना है कि पासपोर्ट कोई साधारण दस्तावेज नहीं है।

इसे जारी करने से पहले सरकार कई तरह की जांच करती है, जिसमें पुलिस सत्यापन भी शामिल होता है। लोगों का मानना है कि जब पासपोर्ट धारक की पहचान और पते की जांच की जाती है, तो इसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा है। इस मुद्दे पर मशहूर गीतकार Javed Akhtar ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय के इस रुख को बेतुका बताया। उनका कहना है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर सरकार पासपोर्ट जारी करते समय किस आधार पर यह तय करती है कि आवेदक भारतीय नागरिक है।

आदित्य ठाकरे ने उठाए सवाल

विदेश मंत्रालय के बयान के बाद कई नेताओं ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नेता Aditya Thackeray ने पूछा कि क्या सरकार का यह कहना है कि गैर-भारतीय लोगों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है, तो इससे दूसरे देशों का भारतीय पासपोर्ट पर भरोसा कम हो सकता है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व नेता Kapil Sibal ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज सबसे मान्य माना जाएगा। इस बयान के बाद पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर बहस और तेज हो गई है।

क्या कहता है कानून?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पासपोर्ट जारी करने से जुड़े 1967 के कानून के तहत कुछ मामलों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, Bombay High Court ने 2013 के एक फैसले में भी कहा था कि कानून गैर-नागरिकों को पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देता है। इसी वजह से सिर्फ पासपोर्ट होना किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का अंतिम या पक्का प्रमाण नहीं माना जाता। नागरिकता से जुड़े मामलों का फैसला Citizenship Act, 1955 के तहत किया जाता है। यही कानून तय करता है कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं।

इस मुद्दे पर भारत की पूर्व विदेश सचिव Nirupama Menon Rao ने भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि कानून और आम लोगों की समझ हमेशा एक जैसी नहीं होती। उनके मुताबिक, पासपोर्ट अधिनियम और नागरिकता अधिनियम दोनों अलग-अलग काम करते हैं। एक कानून पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों से जुड़ा है, जबकि दूसरा किसी व्यक्ति की कानूनी नागरिकता की स्थिति तय करता है।

पासपोर्ट का असली काम क्या है?

  • पूर्व विदेश सचिव Nirupama Menon Rao के अनुसार, पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति की पहचान साबित करना और उसके अधिकारों की रक्षा करना है। यह विदेशी अधिकारियों को बताता है कि पासपोर्ट रखने वाला व्यक्ति वही है, जो वह होने का दावा करता है।
  • राव ने बताया कि पासपोर्ट और नागरिकता में बड़ा अंतर है। पासपोर्ट सरकार की संपत्ति होता है और जरूरत पड़ने पर इसे वापस लिया या जब्त किया जा सकता है। वहीं, किसी व्यक्ति की नागरिकता एक कानूनी स्थिति है, जिसे आसानी से नहीं छीना जा सकता, जब तक कि व्यक्ति खुद उसे छोड़ न दे।
  • इस बीच सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। एक एक्स (X) यूजर ने सवाल किया कि जब आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते और पासपोर्ट जैसी कई सेवाओं के लिए एक-दूसरे दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है, तो आखिर ऐसा कौन-सा दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता को साबित करता है।
  • इस सवाल के जवाब में कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण जन्म प्रमाण पत्र माना जाता है। वहीं, जिन लोगों को बाद में भारतीय नागरिकता दी गई है, उनके लिए नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate) सबसे अहम दस्तावेज होता है।

कैसे मिलती है भारतीय नागरिकता?

भारतीय नागरिकता कैसे मिलती है, इसका जवाब नागरिकता अधिनियम, 1955 में दिया गया है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर जारी प्रश्नोत्तर में Press Information Bureau (PIB) ने बताया है कि भारतीय नागरिकता पांच तरीकों से प्राप्त की जा सकती है। इनमें जन्म के आधार पर नागरिकता, वंश (Descent) के आधार पर नागरिकता, पंजीकरण (Registration) के जरिए नागरिकता, प्राकृतिककरण (Naturalisation) के जरिए नागरिकता और किसी क्षेत्र के भारत में शामिल होने (Incorporation of Territory) के आधार पर नागरिकता शामिल हैं।
यानी हर व्यक्ति को भारतीय नागरिकता एक ही तरीके से नहीं मिलती। उसकी परिस्थितियों और कानूनी पात्रता के आधार पर नागरिकता देने की अलग-अलग व्यवस्था की गई है।

क्या भारतीय नागरिक होने का प्रमाण पत्र मिलता है?

भारत में सभी नागरिकों को नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। आमतौर पर यह प्रमाण पत्र उन लोगों को जारी किया जाता है जो पंजीकरण या प्राकृतिककरण के जरिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करते हैं। जन्म से भारतीय नागरिक बने अधिकांश लोगों के पास ऐसा प्रमाण पत्र नहीं होता है, जो लोग पंजीकरण या प्राकृतिककरण के माध्यम से भारतीय नागरिक बने हैं, उनके लिए सरकार द्वारा जारी नागरिकता प्रमाण पत्र नागरिकता का मुख्य प्रमाण माना जाता है। अन्य भारतीय नागरिकों के लिए अलग-अलग सरकारी दस्तावेज नागरिकता साबित करने में उपयोग किए जा सकते हैं।

नागरिकता प्रमाण पत्र दिया जाता है?

नहीं, सभी भारतीय नागरिकों को नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। यह प्रमाण पत्र आमतौर पर केवल उन लोगों को मिलता है जिन्होंने विशेष प्रक्रिया के जरिए भारतीय नागरिकता हासिल की हो। जन्म या वंश के आधार पर नागरिक बने अधिकांश लोगों को यह प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता है।

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Written By : Rishika Srivastva