Jamal Siddiqui: नई दिल्ली में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Jamal Siddiqui ने कहा है कि गाय को “गौमाता” मानने की परंपरा भारतीय आस्था, संस्कृति और सामाजिक भावनाओं से जुड़ी हुई है, जिसे किसी सरकारी घोषणा या संवैधानिक दर्जे की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि गाय को पहले “राष्ट्रीय पशु” या “राष्ट्रमाता” घोषित किया जाए, तभी उसे माता कहा जाए। इस पर सवाल उठाते हुए सिद्दीकी ने कहा कि महात्मा गांधी को किस संवैधानिक प्रावधान के तहत “राष्ट्रपिता” घोषित किया गया था, जबकि पूरा देश उन्हें इसी सम्मान से संबोधित करता है।
सामाजिक स्वीकृति से मिलता है सम्मान
जमाल सिद्दीकी ने कहा कि समाज कई बार अपने आदर्शों, परंपराओं और भावनाओं के आधार पर सम्मानसूचक संबोधन देता है। गाय को “गौमाता” मानने की परंपरा भी भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, कृषि आधारित जीवनशैली और लोक आस्था से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों लोग गाय को मातृवत सम्मान देते हैं और लोकतांत्रिक समाज में ऐसी आस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
Jamal Siddiqui: गाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भी मजबूत आधार
भाजपा नेता ने कहा कि गाय केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। दूध, दही, घी, मक्खन और अन्य दुग्ध उत्पादों से करोड़ों किसानों और पशुपालकों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है और इसमें गाय आधारित डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता और किसान कल्याण में गाय का योगदान बेहद अहम है।
Jamal Siddiqui: इस्लाम में भी दूध को बताया गया नेमत
जमाल सिद्दीकी ने कहा कि इस्लाम में गाय के दूध को अल्लाह की महान नेमतों में से एक माना गया है। पवित्र कुरआन में दूध को शुद्ध, पौष्टिक और लाभकारी पेय बताया गया है, जो इंसानों के लिए अल्लाह की रहमत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गाय के माध्यम से इंसान को अल्लाह की कुदरत और रहमत का एहसास होता है।
सौहार्द और भाईचारे की अपील
सिद्दीकी ने सभी धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और नागरिकों से अपील की कि वे संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करते समय देश की सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करें और समाज में भाईचारे तथा सौहार्द को मजबूत करने का प्रयास करें।
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