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सुनवाई होती लेकिन समाधान नहीं! सासाराम में जनता दरबार का बना मजाक, न्याय के लिए भटक रहे फरियादी

Janta Darbar

Janta Darbar: सासाराम जिले में आयोजित होने वाला डीएम का जनता दरबार अब केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। हर हफ्ते सैकड़ों मामलों की सुनवाई होने के बावजूद, फरियादियों का समाधान सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाता है। अधिकारियों द्वारा मामलों में कोई सक्रिय रुचि न दिखाने के कारण पीड़ित लगातार दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। फरियादियों का आरोप है कि डीएम स्तर से मामले के निष्पादन के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ढुलमुल रवैये के कारण फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक दौड़ती रहती हैं।

अतिक्रमण को लेकर आठ साल से परेशान पीड़ित

कोआथ गांव निवासी राजू कुमार ठाकुर ने बताया कि उनके जमीन का अतिक्रमण गांव के कुछ दबंग लोगों ने कर लिया है। उनके पास जमीन की जमाबंदी होने के बावजूद, अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते वे थक चुके हैं। अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए वे पिछले आठ साल से प्रयासरत हैं। डीएम से लेकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई न्याय नहीं मिला।

Janta Darbar: आवास योजना की जमीन को लेकर आठवीं बार पहुंचे फरियादी

नोखा अंचल के पेनार गांव की एक महिला फरियादी ने बताया कि उन्हें आवास योजना के तहत तीन डिसमिल जमीन मिली थी। लेकिन घर बनाने से लेकर नाली के पानी तक को लेकर आसपास के लोग प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से उनके घर का पानी नालियों में नहीं बहाया जा रहा है। पुलिस और सीओ से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

डीएम के निर्देश पर भी कार्रवाई नहीं

शिवसागर प्रखंड के अदमापुर गांव के रामचंद्र सिंह ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद जमीन के नामांतरण और परिमार्जन के लिए उन्होंने कई बार आवेदन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम के जनता दरबार में 4-5 बार आने के बावजूद सीओ ने उनके मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।

वहीं संझौली प्रखंड के अंबिका प्रसाद चंद्रवंशी ने कहा कि मत्स्य जीवी समिति के अध्यक्ष और सचिव अधिकारियों की मिलीभगत से सदस्यों को तालाब नहीं दिया जा रहा, बल्कि गैर-सदस्यों को आवंटित किया जा रहा है। डीएम के जनता दरबार और जिला मत्स्य पदाधिकारी के पास आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

Janta Darbar: दो महीने से चक्कर काट रहे दिव्यांग

करगहर प्रखंड के सेंदुआर गांव के मोहम्मद असलम ने बताया कि कब्रिस्तान की घेराबंदी के लिए वे पिछले दो महीने से दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। फरियादियों का कहना है कि जनता दरबार केवल कागजों में ही प्रभावी दिखाई देता है, जबकि असली कार्रवाई और न्याय अब तक नहीं मिल पा रहा।

Report BY: दिवाकर तिवारी

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