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यूपी में योगी की ताबड़तोड़ कार्रवाई, 5 तहसीलदार सस्पेंड और 13 को नोटिस क्यों? जानिए पूरा मामला

UP TEHSILDAR SUSPEND:

UP TEHSILDAR SUSPEND: उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों के निस्तारण में लापरवाही को लेकर योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद की गई समीक्षा के आधार पर हुई है।

29 अगस्त की समीक्षा के बाद शुरू हुआ एक्शन

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त 2026 को राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों के निस्तारण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। इसके बाद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि राजस्व मामलों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता मिलने पर कार्रवाई की जाए। इसी क्रम में 7 सितंबर को प्रदेश की सभी राजस्व अदालतों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 34 के तहत दाखिल मामलों की तहसीलवार और अधिकारीवार समीक्षा की गई। समीक्षा में जिन अधिकारियों की प्रगति संतोषजनक नहीं मिली, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

UP TEHSILDAR SUSPEND: किन 5 तहसीलदारों पर गिरी गाज?

राजस्व परिषद ने पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें अमित यादव, तहसीलदार संडीला, हरदोई; कृष्ण कुमार मिश्रा, तहसीलदार देवरिया; सौरभ कुमार, तहसीलदार जौनपुर; रंजन वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या और वर्तमान तहसीलदार गाजीपुर; तथा अलख शुक्ला, तहसीलदार प्रतापगढ़ शामिल हैं। सरकार की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया जा चुका है। यानी कुछ ही दिनों के भीतर राजस्व मामलों में लापरवाही को लेकर लगातार कार्रवाई हुई है।

13 अफसरों को नोटिस क्यों दिया गया?

जिन अधिकारियों के कामकाज में लंबित राजस्व वादों के निस्तारण को लेकर कमी पाई गई, उनमें से 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें देवरिया, जौनपुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अमेठी, प्रतापगढ़, लखनऊ और रायबरेली समेत कई जिलों में तैनात या पूर्व में तैनात अधिकारी शामिल हैं। नोटिस का मतलब यह है कि संबंधित अधिकारियों से उनकी कार्यप्रगति और कथित लापरवाही को लेकर जवाब मांगा गया है। उनके जवाब और जांच के आधार पर आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

UP TEHSILDAR SUSPEND: सरकार का फोकस क्या है और आम लोगों पर असर?

राजस्व अदालतों से जुड़े मामले सीधे जमीन, नामांतरण और अन्य राजस्व विवादों से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से किसानों और आम लोगों को परेशानी होती है। सरकार का कहना है कि मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण जरूरी है, ताकि लोगों को त्वरित न्याय मिल सके।

राजस्व परिषद ने साफ किया है कि यह कार्रवाई कोई एक बार की कवायद नहीं है, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है। यानी आगे भी राजस्व मामलों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यही वजह है कि पांच तहसीलदारों के निलंबन और 13 अधिकारियों को नोटिस को योगी सरकार की जवाबदेही तय करने की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

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