Jauhar University: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के कुलाधिपति वाले मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर आयकर विभाग की रिपोर्ट में गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सपा सरकार (2012-2017) के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में चार प्रमुख भवनों का निर्माण उत्तर प्रदेश जल निगम की निर्माण इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) द्वारा कराया गया, जिस पर सरकारी खजाने से करीब 17.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
Jauhar University: निर्माण लागत और मूल्यांकन में बड़ा अंतर-
आयकर विभाग के अनुसार, विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद स्थानीय निर्माण एजेंसियों से भवनों का मूल्यांकन कराया गया। इसमें इन भवनों की अनुमानित निर्माण लागत करीब 308 करोड़ रुपये आंकी गई। विभाग ने ट्रस्ट द्वारा दर्शाई गई लागत और मूल्यांकन में सामने आए बड़े अंतर पर सवाल उठाए हैं।
Jauhar University: ट्रस्ट से संतोषजनक जवाब नहीं मिला-
आयकर विभाग का कहना है कि लागत में भारी अंतर को लेकर मौलाना मोहम्मद अली जौहर चैरिटेबल ट्रस्ट से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन ट्रस्ट की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। विभाग ने इस आधार पर विश्वविद्यालय निर्माण में बेहिसाब काले धन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई है।
ट्रस्ट का पंजीकरण किया गया निरस्त-
गौरतलब है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर चैरिटेबल ट्रस्ट के अधीन होता है। आयकर विभाग के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (केंद्रीय) ने 23 जून को इस ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। आदेश में सरकारी धन के उपयोग और निर्माण लागत में कथित विसंगतियों को प्रमुख आधार बताया गया है।
निजी संस्थान पर सार्वजनिक धन खर्च करने पर सवाल-
मुख्य विकास अधिकारी गुलाब चंद्र ने कहा कि सांसद एवं विधायक निधि जैसी सार्वजनिक धनराशि का उपयोग केवल जनहित से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सकता है। किसी निजी संस्थान या निजी लाभ के उद्देश्य से इस प्रकार की निधि का उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता।
यह भी पढ़ें- हिंद महासागर में भारत का बड़ा दांव! सेशेल्स के लिए रवाना हुए PM मोदी बोले- समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत








