Kalli Gurjar: चंबल के बीहड़ों में एक बार फिर डकैतों की दहशत की खबर सामने आई है। जौरा इलाके में चरवाहे से मारपीट और धमकी के बाद कुख्यात कल्ली गुर्जर की तलाश में करीब 200 जवानों ने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में सर्चिंग की। 30 हजार रुपये के इनाम और 15 से ज्यादा मामलों में नाम सामने आने के बाद कल्ली पुलिस के रडार पर है।
जौरा के बीहड़ों में फिर हलचल
मुरैना के जौरा इलाके में एक बार फिर डकैतों की मौजूदगी की आशंका ने पुलिस और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कुख्यात कल्ली गुर्जर को लेकर पुलिस ने पगारा के जंगल और कारसदेव की पहाड़ी क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान चलाया। एक चरवाहे ने पुलिस को शिकायत दी थी कि जंगल के पास एक हथियारबंद व्यक्ति ने उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। हुलिया सामने आने के बाद पुलिस को आशंका हुई कि यह व्यक्ति कल्ली गुर्जर हो सकता है। पुलिस की कई टीमों ने पहाड़ी इलाके में ड्रोन से भी निगरानी की, लेकिन कल्ली का कोई सुराग नहीं मिला।
Kalli Gurjar: कौन है कल्ली गुर्जर?
कल्ली गुर्जर पिछले कुछ वर्षों से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों के 15 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। मुरैना जेल के जेलर को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। जुलाई 2026 में ग्वालियर-मोहना क्षेत्र में एक ट्रक को रोककर उसके टायरों पर फायरिंग और पैसे की मांग किए जाने की घटना में भी कल्ली का नाम सामने आया था।
इनाम और पुलिस की घेराबंदी
कल्ली पर अलग-अलग पुलिस इकाइयों की ओर से इनाम घोषित होने की जानकारी सामने आई है। हालिया रिपोर्ट में मुरैना क्षेत्र में 15 हजार रुपये के इनाम का उल्लेख है, जबकि ग्वालियर पुलिस की रिपोर्टिंग में अलग-अलग जिलों के इनाम को जोड़कर 30 हजार रुपये का आंकड़ा बताया गया है। जौरा की ताजा घटना के बाद करीब 10 थानों की पुलिस टीमें जंगल में उतरीं और ग्वालियर पुलिस को भी अलर्ट किया गया। पहाड़ी और बीहड़ इलाके में ड्रोन से निगरानी की गई।
Kalli Gurjar: चंबल और डकैतों का पुराना रिश्ता
चंबल के बीहड़ लंबे समय तक डकैत गिरोहों के लिए प्राकृतिक ठिकाने रहे हैं। चंबल और उसकी सहायक नदियों के कटाव से बनी दुर्गम घाटियों, खोह और पगडंडियों ने पुलिस के लिए अभियान को चुनौतीपूर्ण बनाया। दशकों तक यहां मान सिंह, मोहर सिंह, माधो सिंह, मलखान सिंह, फूलन देवी, पान सिंह तोमर और निर्भय गुर्जर जैसे कुख्यात नाम चर्चा में रहे। समय के साथ बड़े गिरोह कमजोर हुए, लेकिन छोटे गिरोहों और अपराधी समूहों की गतिविधियां अलग-अलग समय पर सामने आती रही हैं।
मलखान से मोहर सिंह तक, कैसी रही दहशत?
चंबल के इतिहास में मलखान सिंह का नाम विशेष रूप से चर्चित रहा। 1982 में आत्मसमर्पण से पहले उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, हत्या के प्रयास और डकैती समेत बड़ी संख्या में मामले दर्ज थे। इसी तरह मोहर सिंह और माधो सिंह के गिरोहों ने 1960-70 के दशक में चंबल में व्यापक प्रभाव बनाया था। 1972 में मोहर सिंह और उसके साथियों ने जयप्रकाश नारायण के सामने आत्मसमर्पण किया था।
Kalli Gurjar: क्या लौट रहा है बीहड़ का पुराना खौफ?
कल्ली गुर्जर की तलाश को पुराने दौर के बड़े डकैत गिरोहों की वापसी के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, हथियारबंद बदमाश की सूचना, ग्रामीण से मारपीट और पहले सामने आई फायरिंग जैसी घटनाएं पुलिस के लिए गंभीर चुनौती जरूर हैं। फिलहाल पुलिस जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में उसकी तलाश कर रही है। सवाल यही है कि कल्ली गुर्जर अकेला है या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। आने वाली पुलिस जांच और गिरफ्तारियों से तस्वीर साफ होगी।









