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उपराष्ट्रपति ने की ‘कपास क्रांति मिशन’ की सराहना, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर दिया जोर

Kapas Kranti Mission

Kapas Kranti Mission: भारत में कपास उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार प्रस्तावित कपास उत्पादकता मिशन (कपास क्रांति) पर तेजी से काम कर रही है। मंगलवार को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति भवन में मिशन की विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान कपास उत्पादन, गुणवत्ता सुधार और वैश्विक बाजार में भारतीय कपास की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख रणनीतियां

बैठक में मिशन के तीन प्रमुख आयामों पर विशेष जोर दिया गया। पहली रणनीति के तहत अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से प्रति एकड़ कपास की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरी रणनीति में ‘कस्तूरी कॉटन सर्टिफिकेशन’ और ‘किसान कपास ऐप’ जैसी पहलों के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले कपास की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। वहीं तीसरी रणनीति के तहत वस्त्र उद्योग में नवाचार और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए नई पीढ़ी के प्राकृतिक रेशों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है।

Kapas Kranti Mission: समयबद्ध मंजूरी और तकनीक अपनाने पर जोर

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कपास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीकों और अनुसंधान को समयबद्ध मंजूरी मिलनी चाहिए, ताकि उनका लाभ जल्द से जल्द किसानों तक पहुंच सके। उन्होंने स्पष्ट, व्यावहारिक और मापने योग्य लक्ष्य तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत को प्रमुख कपास उत्पादक देशों के बराबर पहुंचने के लिए प्रति एकड़ उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी।

किसानों की आय और निर्यात बढ़ाने पर रहेगा फोकस

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उत्पादकता बढ़ने से किसानों की आय में सुधार होगा, वस्त्र उद्योग को बेहतर गुणवत्ता का कच्चा माल मिलेगा और भारत की निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी। उन्होंने वैश्विक बाजार में भारतीय कपास की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार, किसानों में जागरूकता बढ़ाने और बाजार की मांग के अनुरूप रणनीतियां तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि मिशन की उपलब्धियों और नवाचारों को टेलीविजन डॉक्यूमेंट्री तथा अन्य जनसंचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि किसान और इससे जुड़े सभी हितधारक इस पहल का पूरा लाभ उठा सकें।

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