Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे कैंपस में हलचल मचा दी है। बीएससी थर्ड ईयर की एक छात्रा और जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
आपात बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में डॉ. परमजीत सिंह को शुरुआती जांच में चार गंभीर आरोपों का दोषी माना गया।
जांच समिति के अनुसार, आरोपी शिक्षक पर छात्रा को परीक्षा का पेपर लीक करने का लालच देकर यौन शोषण की कोशिश करने का आरोप है। इसके अलावा उन पर शिक्षक आचरण नियमों का उल्लंघन, मानसिक उत्पीड़न और गोपनीय परीक्षा संबंधी जानकारी साझा करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि प्रोफेसर ने आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सामने गोपनीय परीक्षा जानकारी साझा करने की बात स्वीकार की है।
ऑडियो वायरल होने के बाद छात्रों का प्रदर्शन
ऑडियो वायरल होते ही विश्वविद्यालय में छात्रों का गुस्सा बढ़ गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने कैंपस में जोरदार प्रदर्शन किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की शिकायत के आधार पर हुसैनगंज पुलिस स्टेशन में पेपर लीक मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी शिक्षक को कैंपस से हिरासत में लिया और अगले दिन उन्हें जेल भेज दिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आरोपी शिक्षक के व्यवहार से संस्थान की छवि, सामाजिक प्रतिष्ठा और शैक्षणिक ईमानदारी को बड़ा नुकसान पहुंचा है। जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2015 के नियमों और विशाखा गाइडलाइंस के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
Lucknow University: 15 दिन में मांगा जवाब
प्रशासन ने डॉ. परमजीत सिंह को आरोप पत्र जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ सेवा समाप्ति यानी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए बेहद संवेदनशील बन गया है। छात्रों और कई संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई छात्र संगठन आरोपी शिक्षक को स्थायी रूप से बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ कहा है कि महिला सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।








