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कमजोर मॉनसून का असर, देश के 166 बड़े जलाशयों में पिछले साल से 39% कम पानी

Slow monsoon: इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की धीमी रफ्तार का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की वजह से बड़े जलाशयों का जलस्तर तेजी से घटा है। इससे खेती, पेयजल और बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।

पिछले साल की तुलना में काफी कम पानी

सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC) की 2 जुलाई 2026 की जलाशय भंडारण रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 बड़े जलाशयों में इस समय 47.725 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी उपलब्ध है। जबकि पिछले साल इसी तारीख तक इन जलाशयों में 78.077 BCM पानी था। यानी इस बार जलाशयों में पानी का स्टोरेज पिछले साल के मुकाबले करीब 39% कम है।

Slow monsoon: बारिश में 27% की कमी

भारत मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 1 जून से 4 जुलाई के बीच देश में सामान्य से 27% कम बारिश हुई है। इस अवधि में औसतन 196.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस साल केवल 144.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

Slow monsoon: किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमी?

बारिश की सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 41% कम बारिश हुई। इसके अलावा, मध्य भारत में 23% कम बारिश, उत्तर-पश्चिम भारत में 20% कम बारिश, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 15% कम बारिश रिकॉर्ड की गई।

दिल्ली में भी आधी से कम बारिश

दिल्ली में भी मॉनसून कमजोर रहा। IMD के अनुसार, 1 जून से 3 जुलाई के बीच राजधानी में सामान्य से 49% कम बारिश हुई। जहां इस अवधि में औसतन 75.1 मिमी बारिश होती है, वहीं इस बार सिर्फ 38.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।

दक्षिण भारत के जलाशयों पर सबसे ज्यादा असर

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर दक्षिण भारत के जलाशयों पर पड़ा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना के 47 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में 33.60% कम हो गया है। वहीं पूर्वी भारत के 27 बड़े जलाशयों में पानी 18.01% कम, पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में 15.57% कम और उत्तर भारत के 11 बड़े जलाशयों में 8.87% कम पानी दर्ज किया गया है।

अब मौसम विभाग से राहत की उम्मीद

Slow monsoon: हालांकि मौसम विभाग ने राहत की संभावना जताई है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र (Depression) और मजबूत हो गया है। इसके अगले 24 घंटे में उत्तर ओडिशा तट से टकराने की संभावना है। इसके बाद यह सिस्टम उत्तर ओडिशा और उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ेगा। मौसम विभाग का मानना है कि इस सिस्टम के असर से पूर्वी और मध्य भारत में अच्छी बारिश हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में जलाशयों के घटते जलस्तर में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है

 

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