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बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से ममता गुट बाहर, ऋतब्रत खेमे का बढ़ा दबदबा

Mamata Banerjee

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा की नवगठित बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में तृणमूल कांग्रेस के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समर्थक गुट को जगह नहीं मिलने से राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में शामिल इस समिति में विपक्ष की ओर से शामिल किए गए सभी स्थायी सदस्य उस गुट से हैं, जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी शक्ति संतुलन की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।

विधानसभा की अहम समिति में बड़ा बदलाव

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की प्रमुख वैधानिक समितियों में से एक मानी जाती है। यह समिति प्रत्येक सत्र से पहले बैठक कर सदन की कार्यवाही का खाका तैयार करती है। सत्र की अवधि, कार्यसूची, विधेयकों की प्रस्तुति और विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण फैसले इसी समिति के माध्यम से लिए जाते हैं। विधानसभा की कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में इसकी केंद्रीय भूमिका होती है।

Mamata Banerjee: विपक्षी प्रतिनिधित्व में ऋतब्रत गुट का दबदबा

नवगठित समिति में कुल 19 स्थायी सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें 14 सदस्य सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हैं, जबकि पांच सदस्य विपक्षी तृणमूल कांग्रेस से लिए गए हैं। विशेष बात यह है कि विपक्ष के हिस्से में शामिल सभी पांच सदस्य ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से संबंधित हैं। स्वयं ऋतब्रत बनर्जी भी समिति के स्थायी सदस्य बनाए गए हैं। वर्तमान में वे विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे हैं।

आमंत्रित सदस्यों में भी सीमित प्रतिनिधित्व

स्थायी सदस्यों के अलावा समिति में 10 आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें चार सदस्य भारतीय जनता पार्टी से और दो सदस्य तृणमूल कांग्रेस से हैं। तृणमूल कांग्रेस के आमंत्रित सदस्यों में भी एक प्रतिनिधि ऋतब्रत बनर्जी गुट से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट तथा आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायकों को भी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

Mamata Banerjee: गठन पर सवाल उठाना आसान नहीं

संवैधानिक मामलों के जानकारों का मानना है कि विधानसभा के आधिकारिक अभिलेखों में दोनों गुटों के विधायक अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। ऐसे में तकनीकी और कानूनी दृष्टि से समिति के गठन या उसमें सदस्यों के चयन को चुनौती देना आसान नहीं होगा। हालांकि, समिति में ममता बनर्जी समर्थक गुट की अनुपस्थिति को राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश माना जा रहा है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी आंतरिक खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।

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