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Meetu Bakhtar: ढाका की मीतू अख्तर की जिंदगी पर टूटा दुखों का पहाड़

Meetu Bakhtar: ढाका की मीतू अख्तर की जिंदगी पर टूटा दुखों का पहाड़

Meetu Bakhtar: बांग्लादेश के ढाका जिले के बोरिसल की रहने वाली मीतू अख्तर बिस्ती की प्रेम कहानी आज संघर्ष और बेबसी की कहानी बन चुकी है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती ने उसे सीमाओं के पार भारत तक खींच लाया, लेकिन चार साल बाद वही रिश्ता उसके लिए दर्द और बरबादी का कारण बन गया।

फेसबुक पर हुआ था प्यार

Meetu Bakhtar: मीतू अख्तर के मुताबिक वर्ष 2022 में उसकी पहचान फेसबुक पर झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के एक युवक से हुई। रोज की बातचीत ने कुछ ही महीनों में दोस्ती को प्यार में बदल दिया। मीतू का आरोप है कि युवक ने उसके लिए जुगाड़ से फर्जी पहचान पत्र तैयार कराया और उसे बांग्लादेश से कोलकाता होते हुए मुंबई ले आया।

मुंबई में पेट पालने के लिए बनी बार डांसर

Meetu Bakhtar: मुंबई पहुंचने के बाद हालात उलटते चले गए। आर्थिक तंगी इतनी गहरी हो गई कि रहने-खाने के लिए मीतू अख्तर को बार डांसर तक बनना पड़ा। दोनों एक छोटे से किराए के कमरे में किसी तरह जीवन चलाने लगे।

धर्म परिवर्तन कर की शादी फिर भी नहीं निकला समाधान

Meetu Bakhtar: मीतू अख्तर बताती है कि युवक के परिजन मुस्लिम समुदाय से आने वाली मीतू को अपनाने को तैयार नहीं थे। इस पर जनवरी 2023 में उसने स्वेच्छा से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया। इसके बाद फरवरी 2023 में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी भी कर ली।

पति को नशे की लत, जिम्मेदारी से भागा

शादी के बाद दोनों फिर मुंबई लौट आए। मीतू दावा करती है कि उसने खून-पसीना एक कर कमाया और पति के लिए गाड़ी तक खरीद दी, पर उसके पति की दुनिया सिर्फ नशे के इर्द-गिर्द घूमती रही। आर्थिक बोझ और जिम्मेदारियों से भागने की वजह से संबंधों में कड़वाहट बढ़ती गई।

चौपारण जाने के बहाने निकला… और लौटा ही नहीं

Meetu Bakhtar: फरवरी 2025 में युवक चौपारण स्थित अपने घर जाने की बात कहकर निकला और जल्द लौटने का वादा किया। लेकिन वह आज तक वापस नहीं आया। इसके बाद से मीतू अख्तर अकेली मुंबई में जूझती रही।

भूख तक की नौबत, मदद की गुहार पर खामोशी

मीतू अख्तर बताती है कि किराया और भोजन के लिए पैसे समाप्त हो चुके हैं। मजबूरी में उसने अपनी कानों की बालियां तक बेच दीं। कई बार उसने स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन उसे अभी तक कोई सहायता नहीं मिली।

प्यार के भरोसे घर छोड़ा था, पर आज आसरा भी नहीं बचा

Meetu Bakhtar: मीतू अख्तर का कहना है कि उसने प्यार पर भरोसा कर सीमा पार की, अपना धर्म बदला, कमाई करके पति को संभाला, पर अंत में वह अकेली रह गई। वह अब अपने भविष्य और सुरक्षा को लेकर असहाय व डरी हुई है।

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