Minister Slaps Someone: दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा से जुड़ा थप्पड़ विवाद इन दिनों चर्चा में है। तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान एक युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। युवक की ओर से पुलिस में शिकायत भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने 28 सितंबर को बताया कि इस विवाद को लेकर पांच शिकायतें मिली हैं और मामले की जांच की जा रही है।
Minister Slaps Someone: सड़क निरीक्षण के दौरान क्या हुआ-
मामला दिल्ली के तिलक नगर इलाके का है, जहां सड़क की गुणवत्ता को लेकर विवाद के दौरान प्रवेश वर्मा और वहां मौजूद लोगों के बीच बहस हुई। सामने आए वीडियो में वर्मा एक युवक का मोबाइल नीचे करते और उसके बाद उसे थप्पड़ मारते हुए दिखाई देते हैं। युवक की पहचान साहिब सिंह के तौर पर हुई है। साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि वह घटना का वीडियो बना रहे थे, तभी उनका फोन हटाया गया और उन्हें थप्पड़ मारा गया। उन्होंने अपने साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर भी धक्का देने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि मौके पर मौजूद AAP कार्यकर्ताओं ने उनके परिवार के बारे में आपत्तिजनक बातें की थीं और इसी के बाद विवाद हुआ।
Minister Slaps Someone: पुलिस में शिकायत, क्या हुआ एक्शन-
घटना के बाद साहिब सिंह की ओर से पुलिस में शिकायत दी गई। 28 सितंबर तक दिल्ली पुलिस को इस पूरे विवाद से जुड़ी पांच शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें साहिब सिंह की शिकायत के अलावा PWD कर्मचारियों और BJP कार्यकर्ताओं की शिकायतें भी शामिल हैं। पुलिस ने कहा कि सभी शिकायतों की जांच की जा रही है। बाद में पुलिस ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ कथित रूप से चोट पहुंचाने के आरोप में नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
क्या कहता है कानून-
किसी व्यक्ति को जानबूझकर चोट पहुंचाने पर परिस्थितियों और चोट की प्रकृति के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराएं लागू हो सकती हैं। इसलिए केवल यह कहना सही नहीं होगा कि हर थप्पड़ पर BNS की धारा 115(2) ही लगेगी। BNS की धारा 115 में स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से जुड़े प्रावधान हैं। वहीं धारा 115(2) गंभीर चोट (grievous hurt) पहुंचाने की स्थिति से संबंधित है। गंभीर चोट के मामले में सजा साधारण चोट की तुलना में अधिक हो सकती है।
क्या मंत्री, विधायक या सांसद को कोई विशेष छूट मिलती है?-
सार्वजनिक स्थान पर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट के मामले में केवल जनप्रतिनिधि होने की वजह से अलग आपराधिक कानून लागू नहीं हो जाता। मामले के तथ्यों और आरोप के आधार पर संबंधित कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। संसद और विधानसभा के भीतर किए गए भाषण और कुछ संसदीय कार्यों से जुड़े विशेषाधिकार अलग विषय हैं। लेकिन सार्वजनिक स्थान पर किसी व्यक्ति के साथ कथित मारपीट के मामले में घटना की परिस्थितियों के आधार पर सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
अगर सुरक्षाकर्मी भी मारपीट करें तो?-
अगर किसी घटना में सुरक्षाकर्मी या कोई अन्य व्यक्ति भी कथित तौर पर मारपीट में शामिल पाया जाता है, तो उसकी भूमिका के आधार पर उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस मामले में साहिब सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दिया और खींचकर अलग किया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
थप्पड़ की सजा कितनी होगी?-
थप्पड़ की स्थिति में सजा एक ही तय प्रावधान से निर्धारित नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करती है कि चोट कितनी गंभीर थी, घटना किन परिस्थितियों में हुई, आरोपी की मंशा क्या थी और पुलिस की जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं। अगर चोट गंभीर श्रेणी में आती है, तो BNS के गंभीर चोट से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसलिए किसी मंत्री, विधायक या सांसद द्वारा थप्पड़ मारने पर सीधे एक साल की जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना बताना हर मामले में सही नहीं है।
अभी मामले में क्या स्थिति है?-
फिलहाल प्रवेश वर्मा से जुड़े तिलक नगर विवाद में दोनों पक्षों की ओर से आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने कई शिकायतें मिलने और उनकी जांच किए जाने की जानकारी दी है। इसलिए अंतिम कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और लागू होने वाली धाराओं पर निर्भर करेगी।
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