Modi Cabinet: मोदी सरकार के कैबिनेट में फेरबदल को लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अभी तक बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार मंत्रिमंडल के स्वरूप में कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पुराने रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो मोदी सरकार के हर कार्यकाल में कैबिनेट मंत्रियों की औसत उम्र कम हुई है। ऐसे में इस बार भी युवा चेहरों को प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है।
2014 से लगातार कम हो रही मंत्रियों की औसत उम्र
2014 में मोदी सरकार के गठन के समय कैबिनेट मंत्रियों की औसत उम्र करीब 60 साल थी। 2019 में यह आंकड़ा घटकर 59 साल और 2024 में करीब 58 साल रह गया। यानी पिछले एक दशक में कैबिनेट लगातार युवा हुई है। फिलहाल कैबिनेट रैंक के 20 मंत्री ऐसे हैं, जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है। जीतन राम मांझी सबसे उम्रदराज कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं चिराग पासवान और राम मोहन नायडू 45 साल से कम उम्र के कैबिनेट मंत्रियों में शामिल हैं। स्वतंत्र प्रभाव वाले मंत्रियों में भी चार की उम्र 60 साल से ज्यादा है।
Modi Cabinet: चुनावी राज्यों में युवा चेहरों पर दांव?
कैबिनेट को युवा बनाने के पीछे चुनावी गणित भी अहम हो सकता है। 2027 में उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा और जेन-जी मतदाता हैं। ऐसे में सरकार और संगठन के स्तर पर युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया जा सकता है।
कौन से मंत्री हो सकते हैं बाहर?
कैबिनेट फेरबदल में चुनावी समीकरण के साथ प्रदर्शन भी बड़ा आधार बन सकता है। जिन राज्यों में हाल ही में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, वहां से मंत्रियों की संख्या या जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। बिहार से फिलहाल 8 मंत्री हैं, जिनमें 4 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्री हैं। महाराष्ट्र और गुजरात से भी 6-6 मंत्री केंद्र में हैं। महाराष्ट्र से पीयूष गोयल को हाल ही में बीजेपी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है, हालांकि उनके मंत्रिमंडल में बने रहने या बाहर होने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
Modi Cabinet: यूपी-पंजाब को मिल सकता है ज्यादा प्रतिनिधित्व
फेरबदल में उत्तर प्रदेश और पंजाब को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना पर भी चर्चा है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी फिलहाल राज्य मंत्री हैं। वहीं पंजाब से बीजेपी के केंद्रीय मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है। पंजाब कोटे से केंद्र में मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद यह समीकरण और महत्वपूर्ण हो गया है। इसके अलावा मोदी सरकार में पहले भी ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए ऐसे नेताओं को मंत्री बनाया गया है, जो उस समय संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। एस. जयशंकर इसका प्रमुख उदाहरण हैं। रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कुरियन के मामले में भी ऐसा हुआ। इसलिए इस बार भी कुछ नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों की एंट्री से इनकार नहीं किया जा सकता।
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