Psoriasis Disease: सोरायसिस को आमतौर पर त्वचा से जुड़ी बीमारी माना जाता है, क्योंकि इसके ज्यादातर लक्षण त्वचा पर ही दिखाई देते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इसे केवल त्वचा की समस्या समझना सही नहीं है। सोरायसिस एक सिस्टमिक, इम्यून-मीडिएटेड और इंफ्लेमेटरी कंडीशन है, जिसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। इस विषय को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की।
Psoriasis Disease: क्या सोरायसिस सिर्फ त्वचा की बीमारी है-

सोरायसिस में त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और पपड़ी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इसकी जड़ शरीर के इम्यून सिस्टम से जुड़ी होती है। National Psoriasis Foundation के अनुसार, जब इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है, तो शरीर में सूजन बढ़ाने वाले सिग्नल जारी होने लगते हैं। इन सिग्नल्स के कारण स्किन सेल्स तेजी से बनने लगती हैं और त्वचा पर सोरायसिस के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शरीर में मौजूद सूजन के कारण इसका असर त्वचा के अलावा दूसरे अंगों और स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
Psoriasis Disease: सोरायसिस शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित कर सकता है-
जोड़ों में दर्द और सूजन-
सोरायसिस का असर जोड़ों पर भी पड़ सकता है। Cleveland Clinic के अनुसार, लगभग तीन में से एक सोरायसिस मरीज को सोरायटिक अर्थराइटिस हो सकता है। इसमें जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हार्ट हेल्थ पर पड़ सकता है असर-
सोरायसिस के मरीजों में हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। 2018 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, सोरायसिस से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा अधिक पाया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन और नसों में प्लाक बनने की प्रक्रिया हृदय संबंधी जोखिम को बढ़ा सकती है।
मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा-
2025 में Frontiers in Medicine में प्रकाशित एक सिस्टमिक रिव्यू के मुताबिक, सामान्य लोगों की तुलना में सोरायसिस से पीड़ित लोगों में मेटाबोलिक सिंड्रोम का जोखिम अधिक हो सकता है। सोरायसिस की गंभीरता बढ़ने के साथ यह जोखिम भी बढ़ सकता है। इसके साथ क्रोनिक इंफ्लेमेशन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी जुड़ी हो सकती हैं।
मेंटल हेल्थ पर भी असर-
सोरायसिस का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। National Psoriasis Foundation के अनुसार, सोरायसिस से पीड़ित लोगों में तनाव और मूड से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ लोगों की तुलना में सोरायसिस मरीजों में डिप्रेशन की संभावना 39 फीसदी और एंग्जाइटी की संभावना 31 फीसदी तक अधिक हो सकती है। त्वचा पर दिखाई देने वाले लक्षणों के कारण कुछ लोग सामाजिक गतिविधियों से दूरी भी बनाने लगते हैं।
डॉक्टर की सलाह-
डॉ. करुणा मल्होत्रा के मुताबिक, सोरायसिस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह एक क्रोनिक कंडीशन है, जिसका असर शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ सकता है। इसके साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसलिए अगर त्वचा पर सोरायसिस जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई दें या पहले से सोरायसिस है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच और इलाज करवाना जरूरी है। समय पर उपचार और नियमित मेडिकल फॉलोअप से बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
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