Politics: राजनीति में विषयों को लेकर सवाल उठाना किसी भी पार्टी या दल का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन दूसरे पर हमला करते वक्त यह भी ध्यान रखना होता है कि जो तीर हम छोड़ रहे हैं, कहीं वे निशाने पर लगने के बजाय उल्टे हमारी ही ओर लौटकर तो नहीं आ जाएंगे? रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ (CEO) नियुक्त किये जाने पर आज कांग्रेस के नेता सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें अहसास होना चाहिए कि जो सवाल वे उठा रहे हैं, वे उन्हीं को लपेटे में ले सकते हैं।
क्या कहते हैं कांग्रेस नेता?
राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यह काम साधु-संतों का था। इन लोगों को कोई ईमानदार साधु-संत नहीं मिला, क्या? साधु-संतों से काम छीन लिया, इसी वजह से चढ़ावा चोरी हुई है।कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों के आस्था का विषय है।सीईओ बनाया जाना तभी सार्थक होगा, जब राम मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह से पारदर्शी हो और लोग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।वरिष्ठ कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर एक रिटायर्ड एयर चीफ को नियुक्त किया गया है।आखिर उनका इससे क्या लेना-देना है?
Politics: 7 नवंबर 1966 को कैसे भूल सकते हैं?
कांग्रेस नेताओं की दलीलें या प्रतिक्रियाएं अपनी पार्टी की नीति या राजनीतिक हितों की दृष्टि से उचित हो सकती हैं, लेकिन सवाल उठ सकते हैं कि क्या राजनीति में सिर्फ विरोध के लिए विरोध करना सही है? आज कांग्रेसियों को साधु-संतों का ध्यान आ रहा है तो अच्छी बात है, लेकिन क्या वे याद करेंगे कि 7 नवंबर 1966 को संसद के बाहर गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे इस देश के हजारों साधु-संतों पर किसने गोलियां चलवाई थी ? तब केंद्र में किसकी सकार थी, क्यों साधुओं का खून बहा दिया गया था, क्या वे कोई अनुचित मांग कर रहे थे या गोला-बारूद लेकर चल रहे थे?
Politics: क्या कांग्रेस नेता भविष्य वक्ता हैं?
मान लेते हैं कि कांग्रेस साधु-संतों की चिंता कर रही है, लेकिन कांग्रेस नेता किस आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि CEO के तौर पर एक रिटायर्ड एयर चीफ की नियुक्ति गलत है, किस आधार पर शंका कर सकते हैं कि CEO का काम सही नहीं रहेगा? क्या कांग्रेस नेता भविष्य वक्ता हैं? क्या CEO में प्रबंधन क्षमता या अनुभव नहीं है? जहां तक पारदर्शिता का सवाल है, तो जनता का आज भी सेना अधिकारियों के प्रति अटूट विश्वास बरकरार है।
Politics: साधु-संतों को सम्मान
कांग्रेस नेता बताएंगे कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो तब उन्हें कितना ध्यान आया कि सदियों से करोड़ों जनता की आस्था के केंद्र रहे मंदिरों में साधु-संतों को सम्मान मिलना चाहिए? बदरी-केदार सरीखे मंदिरों में साधु-संतों को सम्मान दिलवाने के लिए कांग्रेस शासन में कितना ध्यान दिया गया? जो कांग्रेस नेता आज मुखर हैं, क्या उन्होंने कभी इस बारे में सुझाव दिये कि हिंदू तीर्थ स्थलों पर कैसे अच्छी व्यवस्थाएं हो सकती हैं?








