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नोटिस से बयान तक: नेहा सिंह राठौर का सरकार पर हमला, बोलीं– ‘मुझे फांसी क्यों नहीं दे देते?’

Neha rathore

Neha rathore : लोकगीत गायिका और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली नेहा सिंह राठौर शनिवार को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं। पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेहा सिंह राठौर ने एक वीडियो बयान जारी कर सरकार और व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।

“सरकार मुझे फांसी क्यों नहीं दे देती

वीडियो बयान में नेहा सिंह राठौर ने कहा कि अगर सरकार को उनसे इतनी ही परेशानी है तो उन्हें सीधे फांसी क्यों नहीं दे दी जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस सरकार को देश की गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार से लड़ना था, वही सरकार एक लोकगायिका से लड़ रही है। नेहा ने भावुक अंदाज में कहा— “ऐसे बचेगी बेटी? लानत है।”

Neha rathore : पहली बार कोतवाली जाने का अनुभव

नेहा सिंह राठौर ने बताया कि यह उनके जीवन का पहला मौका था जब वह किसी कोतवाली के अंदर गईं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव बेहद अजीब और डराने वाला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वहां घूमने नहीं गई थीं, बल्कि पुलिस के नोटिस पर बयान दर्ज कराने पहुंची थीं।

“ना चोरी की, ना गाली दी

नेहा ने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें क्यों बुलाया गया। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने कोई चोरी की, न किसी को गाली दी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्होंने न इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे, न किसी कंपनी से चंदा लिया और न ही वोट चुराए, फिर भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

Neha rathore : प्रधानमंत्री से सवाल पूछना बना अपराध

नेहा सिंह राठौर ने कहा कि उनका असली अपराध यह था कि उन्होंने प्रधानमंत्री से चार सवाल पूछ लिए। उन्होंने कहा कि एक आज़ाद देश की नागरिक होने के नाते उन्होंने आलोचना की, जो सरकार को बर्दाश्त नहीं हुई। “मेरी औकात याद दिलाने के लिए मुझे थाने बुला लिया गया,” नेहा ने कहा।

कानून के लंबे हाथों पर सवाल

नेहा ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कानून के हाथ बहुत लंबे बताए जाते हैं, लेकिन वे अंकिता भंडारी के असली गुनहगारों, इंदौर में दूषित पानी से मौत के जिम्मेदारों, पेपर लीक कराने वालों, नकली दवाओं के कारोबारियों और रेल दुर्घटनाओं के दोषियों तक नहीं पहुंचते।

Neha rathore : “मुंह में ज़ुबान होने की सजा

नेहा सिंह राठौर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें उनकी ज़ुबान की सजा दी जानी चाहिए ताकि देश और दुनिया देखे। उन्होंने सवाल किया कि बेरोजगारी पर बोलना या महंगाई पर गीत गाना क्या अपराध है। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग मंत्रियों को जिम्मेदारी देती है, लेकिन सवाल उठाने पर एक कलाकार को निशाना बनाया जाता है।

सरकार से कानून बनाने की मांग

नेहा ने कहा कि जिस सरकार को देशहित में काम करना चाहिए, वह आलोचकों से लड़ रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि सरकार को जल्द ऐसे कानून बना लेने चाहिए, जिससे सवाल पूछने वालों को चुप कराया जा सके।

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