Australia Fiji Defense : प्रशांत महासागर में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच ऑस्ट्रेलिया और फिजी ने ‘ओशन ऑफ पीस’ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश दिया है। इस समझौते को चीन के बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक प्रभाव के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। समझौते के बाद फिजी अब अमेरिका, न्यूजीलैंड और पापुआ न्यू गिनी के बाद ऑस्ट्रेलिया का चौथा औपचारिक रक्षा सहयोगी बन गया है। दोनों देशों ने जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सुरक्षा में सहयोग, संप्रभुता की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का संकल्प लिया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और फिजी के प्रधानमंत्री सितिवेनी राबुका ने सुवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इसके तहत दोनों देश सुरक्षा संबंधी किसी भी खतरे पर आपसी सलाह-मशविरा करेंगे, रक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे और प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के साझा रक्षा और सुरक्षा हितों की रक्षा करना भी है।
Australia Fiji Defense
इस समझौते की पृष्ठभूमि 2022 में चीन और सोलोमन द्वीप के बीच हुए सुरक्षा समझौते से जुड़ी है। उस समय आशंका जताई गई थी कि चीन भविष्य में प्रशांत क्षेत्र में स्थायी सैन्य अड्डा बना सकता है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने फिजी, पापुआ न्यू गिनी, वानुअतु और तुवालु जैसे देशों के साथ अपने सुरक्षा संबंध तेजी से मजबूत किए। चीन की ‘चेकबुक डिप्लोमेसी’ के जरिए क्षेत्र में बढ़ती पैठ को रोकना भी इस रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
फिजी ने क्यों बनाई चीन से दूरी?
पूर्व प्रधानमंत्री फ्रैंक बैनिमारामा के शासनकाल में फिजी और चीन के संबंध काफी मजबूत हुए थे। हालांकि 2022 में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री सितिवेनी राबुका ने विदेश नीति की दिशा बदलते हुए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे पारंपरिक साझेदारों के साथ रिश्तों को प्राथमिकता दी। राबुका पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिजी किसी भी परिस्थिति में चीन को अपने यहां स्थायी सैन्य अड्डा स्थापित करने की अनुमति नहीं देगा।
अहम है यह समझौता
ऑस्ट्रेलिया-फिजी रक्षा समझौता भारत के इंडो-पैसिफिक विजन और क्वाड की रणनीति को भी मजबूती देता है। प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य मौजूदगी सीमित होने से हिंद महासागर में भारत पर दबाव कम हो सकता है। साथ ही समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा मजबूत होगी और भारत की एफआईपीआईसी पहल को भी सकारात्मक माहौल मिलेगा। फिजी में बड़ी भारतीय मूल की आबादी होने के कारण वहां की राजनीतिक और रणनीतिक स्थिरता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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Written By : Rashmi Sharma








