नई दिल्ली: टैक्स ऑडिट की अंतिम तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स प्रोफेशनल्स की ओर से समय बढ़ाने की मांग भी तेज हो गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘Extend Tax Audit Due Date’ ट्रेंड कर रहा है। प्रोफेशनल्स की मांग है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की मौजूदा 30 सितंबर की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 की जाए। हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि अभी तक सरकार या CBDT की ओर से डेडलाइन बढ़ाने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है। इसलिए सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम के आधार पर टैक्सपेयर्स को नई तारीख मानकर नहीं चलना चाहिए।
New Delhi News: अभी टैक्स ऑडिट की डेडलाइन क्या है?
वित्त वर्ष 2025-26 यानी आकलन वर्ष 2026-27 के लिए सामान्य टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है। वहीं, जिन टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स ऑडिट जरूरी है, उनके लिए ऑडिट के बाद आयकर रिटर्न यानी ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। यही वजह है कि 31 अक्टूबर की मांग को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। टैक्स ऑडिट की तारीख और ऑडिट वाले मामलों में ITR दाखिल करने की तारीख अलग-अलग होती है।
31 अक्टूबर तक समय क्यों मांग रहे टैक्स प्रोफेशनल्स?
टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना है कि ऑडिट की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। इसमें सिर्फ रिपोर्ट तैयार करके पोर्टल पर अपलोड करना ही शामिल नहीं है, बल्कि कारोबारी रिकॉर्ड और अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी का मिलान भी करना पड़ता है। ऑडिट के दौरान बैंक लेनदेन, जीएसटी रिकॉर्ड, टीडीएस-टीसीएस की जानकारी, एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस और बही-खातों जैसी जानकारियों की जांच करनी होती है। इसके अलावा वित्तीय विवरणों में दर्ज आंकड़ों और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में दी जाने वाली जानकारी के बीच भी जरूरी मिलान किया जाता है। प्रोफेशनल्स का तर्क है कि इन सभी प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त समय मिलने से रिपोर्ट तैयार करने में जल्दबाजी कम होगी।
New Delhi News: क्या सिर्फ X पर ही चल रही है डेडलाइन बढ़ाने की मुहिम?
ऐसा नहीं है। टैक्स ऑडिट की समय-सीमा बढ़ाने की मांग सोशल मीडिया के अलावा अलग-अलग टैक्स प्रोफेशनल संगठनों के जरिए भी उठाई गई है। कई संगठनों ने वित्त मंत्रालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को लिखित रूप में अपनी मांग भेजी है। कुछ संगठनों ने 30 सितंबर की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर करने की मांग की है। इसके अलावा कुछ प्रतिनिधित्व में यह भी मांग रखी गई है कि अगर टैक्स ऑडिट की तारीख आगे बढ़ाई जाती है तो ऑडिट वाले मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख को भी आगे किया जाए।

आखिर 30 सितंबर की डेडलाइन में दिक्कत क्या है?
टैक्स प्रोफेशनल्स के मुताबिक, गैर-ऑडिट वाले ITR की समय-सीमा खत्म होने के बाद ऑडिट से जुड़े मामलों का काम एक साथ बढ़ जाता है। ऐसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और उनकी टीमों पर काम का दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है। ऑडिट के दौरान कई दस्तावेजों और आंकड़ों की जांच करनी होती है। किसी एक रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर उसे दोबारा जांचना पड़ सकता है। इसलिए प्रोफेशनल संगठनों का कहना है कि पर्याप्त समय मिलने से आंकड़ों की बेहतर जांच और सही रिपोर्टिंग की जा सकेगी।
New Delhi News: क्या 31 अक्टूबर को नई डेडलाइन मान लें?
अभी नहीं। यह सबसे जरूरी बात है। 31 अक्टूबर 2026 तक समय बढ़ाने की मांग जरूर की जा रही है, लेकिन जब तक CBDT या आयकर विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना या आदेश जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा 30 सितंबर 2026 की तारीख ही लागू मानी जाएगी। यानी X पर ट्रेंड चलने या किसी संगठन की ओर से सरकार को पत्र भेजे जाने से डेडलाइन अपने आप नहीं बदलती। अगर सरकार बाद में समय-सीमा बढ़ाने का फैसला करती है, तभी आधिकारिक आदेश के मुताबिक नई तारीख लागू होगी।
टैक्सपेयर्स अभी क्या करें?
टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले कारोबारियों और अन्य टैक्सपेयर्स के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे संभावित विस्तार का इंतजार करके अपना काम न रोकें। उन्हें अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ मिलकर जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने चाहिए।
खास तौर पर इन चीजों की जांच जरूरी है:
बही-खातों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान
बैंक लेनदेन की जांच
जीएसटी से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान
टीडीएस और टीसीएस की जानकारी की जांच
एआईएस, टीआईएस और फॉर्म 26एएस का मिलान
जरूरी बिल और दस्तावेज उपलब्ध कराना
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की तैयारी









