New Delhi: एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड योगदान के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है।इस नए बदलाव के अनुसार अब आपकी सैलरी भले ही कितनी भी ज्यादा क्यों न हो, PF राशि1800 रुपये ही काटी जाएगी। हालांकि इससे अधिक PF राशि काटी जा सकती है, लेकिन जब आप चाहें।
क्या है नया बदलाव ?
गौरतलब है कि 15,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर कर्मचारी की ओर से 12% का योगदान अनिवार्य है।इस हिसाब से देखें तो यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो नियमानुसार उसकी सैलरी में से 12% यानी लगभग 6000 रुपये की पीएफ राशि काट ली जाती है, लेकिन अब नए बदलाव के अनुसार ऐसा नहीं होगा।अब कर्मचारी पर निर्भर करेगा कि वह 15,000 रुपए से ज्यादा सैलरी होने पर कितना पीएफ कटवाना चाहता है।
स्वैच्छिक होगा कंट्रीब्यूशन
नए नियम के मुताबिक किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी भले ही 1 लाख रुपये प्रति माह हो, लेकिन कंपनी सिर्फ शुरुआती 15000 रुपये की लिमिट पर ही 1800 रुपये काटेगी, जो कि अनिवार्य है। इसमें एम्प्लॉयर (नियोक्ता) का भी उतना ही योगदान रहेगा। बाकी बची हुई सैलरी पर कर्मचारी को ज्यादा पीएफ रिटायरमेंट सेविंग्स के तौर पर कटवाना है या नहीं, यह पूरी तरह से उसकी इच्छा पर निर्भर करेगा।इसमें कर्मचारी पर किसी भी तरह का दबाव नहीं होगा। यानी कि 1800 रुपये से ज्यादा का कंट्रीब्यूशन स्वैच्छिक माना जाएगा।
कंपनियों को भी होगा फायदा
एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026 के प्रावधानों के अनुसार, “कोई कर्मचारी कानूनी वेतन सीमा से ज्यादा वेतन पर कानूनी दर या उससे ज्यादा किसी भी दर पर स्वैच्छिक आधार पर अतिरिक्त योगदान करने का विकल्प चुन सकता है। अगर आप 15000 रुपये से ज्यादा की सैलरी पर पीएफ नहीं कटवाते हैं, तो वह रकम आपकी टेक-होम सैलरी में जोड़ दी जाएगी। EPFO के नए बदलाव से कंपनियों को भी फायदा होना स्वाभाविक है। किसी कर्मचारी की सैलरी ज्यादा होने पर कानूनी तौर पर जो पीएफ राशि कटती थी, उसी हिसाब से कंपनियों को भी ज्यादा कंट्रीब्यूशन करना पड़ता था, लेकिन नए नियम के अनुसार यदि कर्मचारी 1800 रुपये से ज्यादा का कंट्रीब्यूशन नहीं चाहेगा, तो कंपनी भी ज्यादा कंट्रीब्यूशन से बच जाएगी।








