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NALSAR विवाद के बाद BCI पर सवाल, मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व की हो रही चर्चा

BCI NALSAR Controversy:

BCI NALSAR Controversy: हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़े विवाद ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की कार्यप्रणाली और अधिकार क्षेत्र को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स को वकील के तौर पर रजिस्टर करने पर BCI की ओर से लगाई गई रोक कुछ ही घंटों में वापस लिए जाने के बाद कानूनी जगत में सवाल उठ रहे हैं। इस घटनाक्रम के बीच BCI के लंबे समय से नेतृत्व को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। BCI का नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता और बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा कर रहे हैं।

BCI NALSAR Controversy: क्या है NALSAR का पूरा मामला-

हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स के एडवोकेट के तौर पर रजिस्ट्रेशन को लेकर BCI ने रोक लगाने का फैसला किया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद यह फैसला कुछ ही घंटों में वापस ले लिया गया। मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी BCI की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह के मामलों में संस्था के अधिकार क्षेत्र की सीमा महत्वपूर्ण है।

BCI NALSAR Controversy: BCI क्या काम करता है-

बार काउंसिल ऑफ इंडिया का गठन Advocates Act, 1961 के तहत हुआ है। इसका प्रमुख काम वकीलों के पेशेवर आचरण और अनुशासन से जुड़े नियम तय करना, कानूनी शिक्षा के मानकों को बनाए रखना और लॉ संस्थानों से जुड़ी मान्यता व्यवस्था में भूमिका निभाना है।

वकीलों के रजिस्ट्रेशन का अधिकार किसके पास-

कानूनी व्यवस्था के मुताबिक, किसी व्यक्ति को राज्य में एडवोकेट के तौर पर रजिस्टर करने की जिम्मेदारी संबंधित State Bar Council की होती है। इसी वजह से NALSAR मामले में BCI की कार्रवाई को लेकर उसके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठे।

मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व पर क्यों चर्चा-

NALSAR विवाद के बाद BCI के नेतृत्व और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता और बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा लंबे समय से BCI से जुड़े नेतृत्व में रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर को लेकर भी चर्चा होती रही है। वे पहले BSP और कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं और बाद में बीजेपी से जुड़े।

फर्जी डिग्री वाले वकीलों का दावा भी चर्चा में-

इस विवाद के बीच मनन कुमार मिश्रा के उन कथित बयानों का भी जिक्र हो रहा है, जिनमें उन्होंने देश में बड़ी संख्या में वकीलों के पास कथित फर्जी डिग्री होने की बात कही थी। यदि रेगुलेटरी संस्था के नेतृत्व की ओर से ऐसे गंभीर दावे किए जाते हैं, तो इससे वकीलों के रजिस्ट्रेशन और निगरानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, ऐसे प्रतिशत संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक आंकड़ों से सत्यापन जरूरी है।

BCI की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल-

NALSAR मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि बार काउंसिल जैसी नियामक संस्था को अपने अधिकार क्षेत्र में किस तरह काम करना चाहिए। साथ ही, वकीलों के रजिस्ट्रेशन, लॉ कॉलेजों की मान्यता और पेशेवर आचरण की निगरानी में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल सामने आए हैं

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