UP News: राजनीति में असहमति और विरोध का सिलसिला चलता रहता है, लेकिन विरोध के नाम पर अनावश्यक बवाल खड़ा करना या यूं कहें कि बाल की खाल निकालना उचित नहीं माना जा सकता है।रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा और एबीवीपी के बीच विवाद हुआ तो प्रशासन ने वहां पहुंचकर दोनों पक्षों को सुना और स्थिति नियंत्रित भी कर ली। इसके बावजूद सपा प्रमुख अखिलेश यादव का इसे राजनीतिक रंग देना पचने वाला नहीं है।अखिलेश यादव ने इस विवाद पर कहा कि प्रदेश में सरकार नहीं, बल्कि सजातीयवाद चल रहा है, सत्ता में बैठे लोग लगातार पीडीए पर प्रहार कर रहे हैं।
आग में घी डालने का काम न करें
अखिलेश यादव एक पार्टी के मुखिया हैं। जाहिर है कि उन्हें मालूम होगा कि देश के कई विश्वविद्यालयों में पहले भी छात्रों के बीच भिड़तें होती रही हैं। इन भिड़तों के बाद छात्रों ने तत्काल मतभेदों को भुलाकर सुलह भी कर ली।तय है कि कल के दिन रायबरेली में भी छात्र आपसी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाएंगे।ऐसे में किसी भी राजनीतिक पार्टी को उनकी आड़ में मोर्चा नहीं खोलना चाहिए।यह सच है कि छात्र संगठन राजनीतिक दलों से संबंद्ध होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि राजनीतिक दल उनके हिमायती बनकर किसी विवाद को शांत करने के बजाय आग में घी डालने का काम करें।
UP News: छात्रों के विवाद को पीडीए से जोड़ देना उचित नहीं
अखिलेश प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।ऐसे में उनसे एक सुलझे हुए राजनेता की भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन छात्रों के विवाद पर उन्होंने जो कहा उससे तो ऐसा लगता है कि वे इस विवाद को अपने राजनीतिक एजेंडे की सफलता का हथियार बनाना चाहते हैं।अखिलेश यादव ने विवाद को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इसे PDA पर हमले के रूप में पेश किया। यही नहीं उन्होंने 24 सितंबर को PDA रथ के साथ रायबरेली जाने का कार्यक्रम भी घोषित किया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव करीब है।अखिलेश की रणनीति पीडीए फॉर्मूले के बूते सत्ता में वापसी की दिखाई देती है, लेकिन छात्रों के विवाद को पीडीए से जोड़ देना उचित नहीं माना जा सकता है।
जिसके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं मारा करते
अखिलेश यादव और सपा के कार्यकर्ता छात्रों के विवाद के बहाने यह संदेश देने की रणनीति में भी दिखाई देते हैं कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था ठीक नहीं है।पुलिस भेदभाव की नीति अपना रही है। इससे पीडीए के साथ अन्याय हो रहा है। वे अपनी रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें थोड़ा रुककर यह भी देखना होगा कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं मारा करते हैं। जो सवाल वे उठाना चाहते हैं, वे उन्हीं को कटघरे में खड़ा कर सकते हैं।आखिर कौन नहीं जानता कि 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता संभालने से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कैसे चरमराई हुई थी और आज क्या है? जनता सब जानती है, उसे बरगलाया नहीं जा सकता है।वह देख रही है कि आज योगी राज में गुंडागर्दी का कहीं नामोनिशान नहीं रहा, तो वह कैसे भरोसा कर लेगी कि प्रदेश की कानून- व्यवस्था भेदभावपूर्ण है? अखिलेश ध्यान रखें कि कहीं योगी सरकार को घेरने के चक्कर में खुद जनता के सवालों से न घिर जाएं।
लेखिका: स्वाति शर्मा
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