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चेक बाउंस हुआ तो साइनिंग अधिकारी को होगी सजा, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

New Delhi: चेक बाउंस हुआ तो साइनिंग अधिकारी को होगी सजा, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
New Delhi: यदि कोई कंपनी, सोसाइटी या एनजीओ अपने किसी अधिकारी या पदाधिकारी को चेक जारी करने का अधिकार देते हैं, तो चेक बाउंस होने की स्थिति में केवल संबंधित कंपनी, सोसाइटी या एनजीओ ही दोषी नहीं माने जाएंगे, बल्कि  चेक साइनिंग अधिकारी भी नप जाएंगे।चेक बाउंस से संबंधित एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि साइनिंग अधिकारी सीधे तौर पर लेन-देन के लिए जिम्मेदार है, तो चेक बाउंस (Dishonour of Cheque) होने की स्थिति में उस पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है। उसे कारावास की सजा हो सकती है।

जिम्मेदारी से बच नहीं सकते साइनिंग अधिकारी 

दरअसल, तेलंगाना के एक स्वयं सेवी संगठन (NGO) की ओर से एक बिजली वितरण कंपनी को जो चेक जारी किया गया था, वह बाउंस हो गया था।इसके बाद नियमानुसार आपराधिक कार्यवाही शुरू हुई।NGO का चेक कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर से जारी हुआ था।कोषाध्यक्ष ने दलील दी कि वह केवल NGO का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता था इसलिए NGO के कार्यों के लिए उसे व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सुनवाई न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने की। सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब कोई संस्था किसी व्यक्ति को चेक साइन करने, उसे जारी करने तथा भुगतान की जिम्मेदारी सौंपती  है, तो तब वह व्यक्ति सिर्फ प्रतिनिधि नहीं रह जाता, बल्कि लेन-देन का असली जिम्मेदार अधिकारी हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने NGO के कोषाध्यक्ष की सजा को बरकरार रखा।

New Delhi:  वित्तीय निर्णयों में शामिल पदाधिकारी ही दोषी 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संस्था में सिर्फ ‘अध्यक्ष’ या ‘सचिव’ के पद पर है, तो उसे स्वतः आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा है कि चेक बाउंस होने पर उसी अधिकारी को दोषी माना जाएगा जो संस्था के दैनिक संचालन और वित्तीय निर्णयों में सक्रिय रूप से शामिल हो।