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ममता बनर्जी के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं तेज, क्या ऐसा संभव है ?

New Delhi: ममता बनर्जी के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं तेज, क्या ऐसा संभव है ?
New Delhi: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी को झटके पर झटके लग रहे हैं।न सिर्फ विधायकों और सांसदों ने उनका साथ छोड़ा, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अस्तित्व भी संकट में पड़ गया है। ऐसे में सवाल यह है कि अब ममता को अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए क्या विकल्प चुनना चाहिए ? ममता के सामने एक सीधा सा विकल्प यह है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की मजबूती के लिए पूरी ताकत के साथ जुट जाएं। दूसरा विकल्प यह है कि वे तृणमूल कांग्रेस के बचे हुए समर्थकों के साथ अपनी मूल पार्टी कांग्रेस में वापसी कर जाएं। दोनों ही विकल्प उनके सामने हैं, अब देखना है कि वे क्या निर्णय करती हैं? फिलहाल  यह चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि ममता बनर्जी कांग्रेस में विलय कर सकती हैं।

क्यों हो रही हैं विलय की चर्चाएं ?

दरअसल, विलय की चर्चाओं को इसलिए बल मिला कि मंगलवार को ममता बनर्जी की कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से बैठक हुई और अगले दिन बुधवार को राहुल गांधी से अभिषेक बनर्जी की अलग से बैठक हुई।राजनीतिक नजरिये से देखें तो ये बैठकें काफी महत्वपूर्ण हैं।चर्चा तो यहां तक चल रही है कि कांग्रेस ने ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद देने की बात कही है। हालांकि टीएमसी के बड़े नेताओं ने विलय की संभावनाओं को खारिज किया है, लेकिन इस बारे में ममता का मौन सोचने को विवश करता है। दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद जब वे कोलकाता लौटीं तो मीडियाकर्मियों ने उनसे टीएमसी के कांग्रेस में विलय की संभावना के बारे में जानना चाहा। इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और वे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गईं। राजनीति में इस बिना कुछ कहे निकल जाने या फिर मौन साध लेने के गहरे मायने होते हैं। कहा जाता है कि कभी-कभी खामोशी बोलने से ज्यादा बोल देती है। 

New Delhi: तृणमूल से मूल की ओर

ममता बनर्जी एक समय में कांग्रेस की तेजतर्रार नेता थीं। उनकी गिनती कांग्रेस के युवा तुर्कों में होती थी, लेकिन 1998 में उन्होंने  कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना कर ली। ममता ने अपनी मेहनत और राजनीतिक कौशल के बूते टीएमसी को जनता के बीच लोकप्रिय बनाया और राज्य में वाम मोर्चा को उखाड़ फेंका।उन्होंने वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ इतना जबर्दस्त अभियान चलाया कि लोग उनके नेतृत्व में भरोसा करने लगे और उन्हें राज्य की बागडोर सौंप दी। मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी ने तीन कार्यकाल पूरे किये। अब  वे सत्ता से बाहर हैं और उनकी पार्टी अंतिम सांसें ले रही है, तो उनकी छटपटाहट उन्हें सोनिया गांधी तक लेकर गई।
New Delhi: विलय की संभावनाएं
ममता के कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं से एकदम इनकार भी नहीं किया जा सकता है। टीएमसी के बागी नेता उनके लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर चुके हैं। राज्य विधानसभा में उन्होंने ममता की भावनाओं के विरुद्ध प्रतिपक्ष का नेता बना लिया।अब वे पार्टी के चुनाव चिन्ह और कार्यालय को हथियाने की रणनीति में हैं। इसमें वे कामयाब भी हो जाएंगे। ऐसे में ममता कांग्रेस में सक्रिय होकर फिर से अपना अभियान शुरू कर सकती हैं। वे भविष्य में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को सत्ता में लाकर बागियों को सबक सिखा सकती हैं।राज्य में कांग्रेस की मजबूती भाजपा को भी जवाब होगा।