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ओडिशा में BJP सरकार के 26 महीने पूरे, फिर भी खाली निगम-बोर्डों के पद; कार्यकर्ताओं में बढ़ी नाराजगी

Odisha BJP

Odisha BJP: ओडिशा में भाजपा सरकार को सत्ता में आए करीब 26 महीने बीत चुके हैं, लेकिन पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और दूसरी पंक्ति के नेताओं के बीच अब असंतोष के स्वर तेज होने लगे हैं। चुनाव में संगठन को मजबूत करने और भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले कई नेताओं को अब तक निगमों और बोर्डों में जिम्मेदारी नहीं मिल पाई है। लंबे समय से अध्यक्ष पद की उम्मीद लगाए बैठे कार्यकर्ताओं को लगातार आश्वासन मिलने से उनका उत्साह भी कम होता नजर आ रहा है। सरकार में मंत्री और विधायक अपनी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, लेकिन पार्टी के समर्पित कैडर को राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है। माना जा रहा है कि नियुक्तियों में देरी का असर अब सरकार और संगठन की छवि पर भी पड़ने लगा है।

नियुक्तियों के दावों के बावजूद नहीं बदली स्थिति

केंद्रीय प्रभारी और प्रदेश भाजपा नेतृत्व की ओर से कई बार निगमों और बोर्डों में जल्द नियुक्तियां किए जाने के संकेत दिए गए। इसके बावजूद लंबे समय बाद भी स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है। इससे उन कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए जमीन पर सक्रिय भूमिका निभाई थी। राज्य के कई प्रमुख निगम और बोर्ड फिलहाल स्थायी अध्यक्षों के बिना संचालित हो रहे हैं। पिछले जून में सरकार ने खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश की थी। सार्वजनिक उद्यम विभाग की ओर से जारी निर्देश में 30 जून तक नियुक्तियां पूरी करने की समयसीमा तय किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, समयसीमा बीतने के डेढ़ महीने से ज्यादा समय बाद भी नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं।

Odisha BJP: गुटबाजी या फैसले लेने में देरी

नियुक्तियों में लगातार देरी को लेकर अब भाजपा के भीतर और राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि क्या पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और संभावित गुटबाजी इसकी वजह है या नेतृत्व सत्ता संतुलन साधने में मुश्किल का सामना कर रहा है। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर सरकार राजनीतिक नियुक्तियां करने में अभी तैयार नहीं है, तो निगमों और बोर्डों के कामकाज को सुचारू रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को पूर्ण जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जा रही है।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी बन सकती है चुनौती

भाजपा के लिए जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी आने वाले समय में संगठनात्मक चुनौती बन सकती है। चुनाव के दौरान जिस कैडर ने पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में भूमिका निभाई, उसी वर्ग में अब उपेक्षा की भावना बढ़ने की चर्चा है। राजनीतिक नियुक्तियों में देरी और निगम-बोर्डों के लंबे समय तक बिना अध्यक्ष के चलने से सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह असंतोष आने वाले समय में ओडिशा भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती का रूप ले सकता है।

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