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नाना पाटेकर: सिनेमा ही नहीं, असल जिंदगी के भी हीरो: जीने की बेहतर कला सीखाकर चले गए…

Opinion: नाना पाटेकर: सिनेमा ही नहीं, असल जिंदगी के भी हीरो
Opinion: नाना पाटेकर: सिनेमा ही नहीं, असल जिंदगी के भी हीरो
Opinion: जीवन के लिए भौतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति अपना पूरा जीवन भौतिक संसाधनों को जुटाने की होड़ में ही गंवा दे? भले ही कोई व्यक्ति करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति कमा ले, एक के बजाय कई घर बना ले, लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से सोचें तो एक व्यक्ति एक बार में सिर्फ एक ही बिस्तर पर सो सकता है, एक वक्त के भोजन में चार-छह रोटी, दाल सब्जी, चावल, सलाद और थोड़ा बहुत मिष्ठान से ज्यादा भला और कितना खा पाएगा? जीने की जरूरतें वास्तव में सीमित होती हैं, इसलिए इंसान को अपनी सारी ऊर्जा और समय भौतिक संसाधनों को जुटाने में ही नहीं लगा देना चाहिए। फिर भौतिक संसाधन जुटा भी लिये तो सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरे के काम भी आने चाहिए।फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर वास्तव में यही प्रेरणा देकर चले गए। 

दिलों पर राज किया और करते रहेंगे

फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने अपने बेहतरीन अभिनय से लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। बेशक वे दुनिया से चले गए हों, लेकिन उनकी यादें लोगों के दिलो-दिमाग में हमेशा बनी रहेंगी। वे न सिर्फ अपनी फिल्मों एवं कला को लेकर याद किये जाएंगे, बल्कि लोग उन्हें इस मायने में भी बहुत याद करेंगे कि तमाम भौतिक सुविधाओं को छोड़कर कैसे इंसान सादगीपूर्ण ढंग से सुखद जीवन जी सकता है। 
नाना पाटेकर को फिल्म जगत में अपार सफलता मिली, उन्होंने खूब यश और समृद्धि हासिल की, लेकिन उन्होंने तड़क-भड़क और अनावश्यक दिखावे के बजाय बेहद साधारण जीवन जीना पसंद किया। उन्होंने हमेशा साधारण कपड़े पहने और साधारण गाड़ियों में ही आना-जाना किया, यहां तक कि वे मुंबई में एक सामान्य 1BHK फ्लैट में रहा करते थे। इतना ही नहीं मायानगरी मुंबई की चकाचौंध के बजाय उन्होंने अपने गांव में रहना पसंद किया।वे कहते थे कि “जरूरतें सीमित रखना बहुत आसान है। मेरे पास एसी नहीं है क्योंकि मुझे उसकी जरूरत नहीं लगती। जैसे शहर में चारों तरफ दीवारें होती हैं, वैसे ही मेरे घर के चारों ओर पहाड़ हैं।पहाड़ों से घिरा हुआ मेरा घर है और मैं वहीं आराम से रहता हूं। मुझे यह बहुत अच्छा लगता है।”

Opinion: यश और समृद्धि का कभी अहंकार नहीं किया

आज आदमी जरा सा यश और पैसा पाकर अंहकार कर लेता है, लेकिन दूसरी तरफ नाना पाटेकर जैसे ‘रीयल हीरो’ भी हैं जिनका जीवन समाज को सादा-जीनव और उच्च विचार की प्रेरणा देता है। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा है, “हमको मालूम है कि कल हमको जाना है। हमको 12 मन लकड़ी लगने वाली है। उतनी ही लगनी है। दैट इज माई फाइनल प्रॉपर्टी।” इस वीडियो में कहे गए शब्द  उनकी वास्तविक जिंदगी से पूरी तरह मेल खाते हैं। उन्होंने आलीशान सुविधाओं के बजाए सादगीपूर्ण जीवन जीने का विचार किया, तो यह विचार उनके अध्ययन के साथ ही अनुभव से भी उपजा हुआ था। बचपन से लेकर और जीवन के अंतिम दिनों तक उन्होंने बहुत सारे अनुभव हासिल किये।मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पत्थर की खदानों में काम किया और परिवार चलाने के लिए फिल्मी पोस्टर भी रंगे। 35 रुपए महीने के लिए उन्हें प्रतिदिन 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही नापनी पड़ी। इसके बाद शिक्षा और अभिनय के क्षेत्र में भी उन्हें संघर्ष करना पड़ा, लेकिन वे निरंतर आगे बढ़ते रहे। 

देश और समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति

नाना पाटेकर जीवन में आगे बढ़े, तो पीछे छूट गए लोगों को उन्होंने नजरंदाज नहीं किया। वे समाजिक जीवन में बने रहे। नाम फाउंडेशन (Naam Foundation) के माध्यम से उन्होंने सूखे से पीड़ित किसानों और उनके परिवारों की मदद की।अपनी कमाई और पुरस्कारों में मिलने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा वे समाज सेवा व किसानों के लिए दान कर देते थे।बिना किसी पब्लिसिटी के चुपचाप गांवों में लोगों के बीच जाना, जरूरतमंदों की मदद करना और समाज में बदलाव लाना नाना पाटेकर जी जीवन शैली रही।वे अपने राष्ट्र और सेना से भी बहुत प्रेम करते थे।नाना पाटेकर का जीवन फिल्म जगत, समाज, राजनीति आदि विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणादायक है।वे हर इंसान को बेहतर जीवन जीने की कला सीखाकर चले गए हैं।उनका जाना देश और समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है।