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पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी कट्टरता के नए चेहरे: रिपोर्ट में उजागर हुई वैश्विक खतरे की तस्वीर

पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी कट्टरता
पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी कट्टरता

Pakistan Turkey Extremism: पाकिस्तान को बने हुए सात दशक से अधिक समय हो चुके हैं, लेकिन आज भी वह खुद को एक जिम्मेदार और स्थिर देश के रूप में स्थापित नहीं कर पाया है। दूसरी ओर, तुर्किये पर इस्लामी कट्टरता और उग्र सोच को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। एक प्रमुख पोर्टल पर प्रकाशित विचारात्मक रिपोर्ट में ये बातें कही गई हैं।

लोकतंत्र लौट रहा चुनावों के बाद

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों को चुपचाप समर्थन दिया। खासतौर पर वर्ष 2024 में हुए छात्र आंदोलन को परोक्ष रूप से समर्थन देने का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि इन घटनाओं के कारण बांग्लादेश दो वर्षों तक अव्यवस्था और हिंसा से जूझता रहा। हालांकि 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनावों के बाद वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से सामान्य होती दिखाई दे रही है, लेकिन बीते समय में पाकिस्तान की ओर से भारत-विरोधी माहौल बनाने की कोशिशें स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। विशेष रूप से पूर्वी पाकिस्तान रहे बांग्लादेश में इस तरह की गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।

Pakistan Turkey Extremism: पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी कट्टरता
पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी कट्टरता

Pakistan Turkey Extremism: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की भूमिका

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका कई बार उजागर हो चुकी है। बांग्लादेश में उथल-पुथल के दौरान भी पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक और मोर्चा खोलने की कोशिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को कुछ खाड़ी देशों जैसे कतर, तुर्किये और सऊदी अरब से आर्थिक और सैन्य सहयोग मिलता रहा है। इसके अलावा चीन जैसे देश भी भारत को कमजोर करने की रणनीति के तहत पाकिस्तान का उपयोग करते हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को “जहरीली नोक वाला खंजर” कहा गया है, जिसे अलग-अलग देश भारत के खिलाफ तथाकथित ‘ग्रे जोन वॉर’ के लिए इस्तेमाल करते हैं।

पाकिस्तान बढ़ा रहा अलगाववाद

रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि पाकिस्तान अलगाववादी विचारों को बढ़ावा देता है। साथ ही तुर्किये और कतर के साथ मिलकर भारत के 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम समुदाय को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए रिपोर्ट ने भारत को विशेष रूप से तुर्किये के प्रति ‘पारस्परिकता की नीति’ अपनाने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्किये भारतीय मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति देता है और उन पर कट्टर विचारधारा का प्रभाव डालने का प्रयास करता है। इसके जवाब में सुझाव दिया गया है कि भारत को कुर्द छात्रों का स्वागत करना चाहिए और उन्हें अपनी पहचान, सांस्कृतिक अधिकारों और राजनीतिक अधिकारों के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर देना चाहिए। ऐसा करने से तुर्किये में बढ़ती अधिनायकवादी प्रवृत्तियों का संतुलन किया जा सकता है।

पाकिस्तान भटक गया नफरत की राह

रिपोर्ट में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि जिन्ना ने पाकिस्तान को मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र के रूप में परिभाषित किया था। लेकिन समय के साथ पाकिस्तान नफरत, आक्रामकता और असहिष्णुता की राह पर आगे बढ़ गया।

अंत में रिपोर्ट में तुर्किये को 21वीं सदी में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख केंद्र बताया गया है। साथ ही विश्व की बड़ी शक्तियों, खासकर भारत, से अपील की गई है कि वे इस्लामी उग्रवाद और कट्टरता के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि दुनिया को और अधिक धार्मिक विभाजन की ओर जाने से रोका जा सके।