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‘पप्पू मीडिया’ की सूची हुई जारी, 36 पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के नाम आए सामने

Pappu Media List:

Pappu Media List: सोशल मीडिया पर एक पोस्टर को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इसमें देश के 36 पत्रकारों, यूट्यूबर्स और मीडिया संस्थानों के नाम ‘पप्पू मीडिया’ शीर्षक के तहत दिए गए हैं। पोस्टर में शामिल लोगों को मोदी सरकार का आलोचक बताया गया है। हालांकि, यह सूची किसने तैयार की और नाम शामिल करने का आधार क्या रहा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन दावा किया जा रहा है कि ये वे लोग है जो सरकार के हर कार्य में नकारात्मकता खोजते है। जो खुद से एजेंडे तैयार करके लोगों को भड़काने का कार्य कर रहे है। पोस्टर सामने आने के बाद बहस सिर्फ इसमें शामिल नामों तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी उठ रहा है कि इन सभी लोगों की मंशा क्या है ये चाहते क्या है?

Pappu Media List: रविश कुमार से ध्रुव राठी तक कई चर्चित नाम

वायरल पोस्टर में अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा, रविश कुमार, ध्रुव राठी, आकाश बनर्जी, करण थापर, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, पुण्य प्रसून बाजपेयी, अभिनंदन सेकरी, मनीषा पांडे, विनोद कापड़ी, आशुतोष और साक्षी जोशी समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं। पत्रकारों के अलावा BBC हिंदी, न्यूज़लॉन्ड्री, द वायर, द क्विंट, स्क्रॉल, सत्य हिंदी, न्यूज़क्लिक, HW न्यूज़ नेटवर्क, 4PM न्यूज़, बोलता हिंदुस्तान, नेशनल दस्तक, द मूकनायक, द कारवां, ऑल्ट न्यूज़ और नेशनल हेराल्ड टीवी जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म के नाम भी पोस्टर में दिए गए हैं।

Pappu Media List: सरकार की आलोचना या राजनीतिक एजेंडा

आरोप है कि यह वे लोग है जो सरकार की आलोचना ना करते हुए कई राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे चला रहे है।
पत्रकारिता में सरकार की कमियों के अलावा उनके द्वारा चलाई जा रही जनहितकारी योजनाओं को भी बढ़ावा देना है लेकिन ये ऐसा नहीं करते। लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका केवल सरकारी फैसलों की जानकारी देना नहीं है। उनकी जिम्मेदारी नीतियों की पड़ताल करना, उनके असर को समझना और जरूरत पड़ने पर सत्ता से सवाल पूछना भी है। लेकिन ये सभी कार्य राष्ट्र और राज्य धर्म के अनुरूप होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर बहस, दावा विचार धारा हो रही हावी

इस पोस्टर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। अब कई राष्ट्रवादी पत्रकार इन्हें पप्पू मीडिया से संबोधित कर रहे है। उनका यह कहना है ये सभी एक विशेष खेमे या परिवार के एजेंडों को पूरा करने के लिए पत्रकारिता के नाम पर अपने एजेंडे चला रहे है। अगर कोई पत्रकार गलत तथ्य प्रस्तुत करता है, किसी घटना का अधूरा संदर्भ देता है या बिना पर्याप्त प्रमाण के दावा करता है, तो उसकी आलोचना होनी चाहिए।

‘पप्पू मीडिया’ नाम पर भी सवाल

पप्पू मीडिया ये वो शब्द है जो इन दिनों बहुत छाया हुआ है। ये उन पत्रकारों के लिए प्रयोग किया जा रहा है जो हर समय नकारात्मकता के आदि रहते है। जो किसी विशेष परिवार के लिए काम करते है।

पत्रकारिता का पैमाना क्या होना चाहिए

मीडिया की भूमिका पर बहस नई नहीं है। हर दौर में पत्रकारों के काम, उनकी विचारधारा और सत्ता के साथ उनके संबंधों पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन किसी भी लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता और जवाबदेह पत्रकारिता, दोनों का महत्व है। लेकिन किसी विशेष मंशा को पूरा करने के लिए की गई पत्रकारिता देश काल, परिस्थिति के लिए हानिकारक है।

पैसों में नैरेटिव सेट कर रहे तथाकथित पत्रकार

अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ इंस्टा यूजर्स के वीडियों वायरल हो रहे है जिसमें दावा किया जा रहा है कि कुछ तथाकथित पत्रकार चंद रुपयों में नैरेटिव सेट करने के लिए तैयार होते दिखाई दे रहे है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर प्रसारित एक पोस्टर में किए गए दावों और उससे जुड़ी बहस पर आधारित है। पोस्टर की उत्पत्ति, सूची तैयार करने के मानदंड और उसमें शामिल नामों के बारे में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। हम इन सभी तथ्यों का व्यक्ति विशेष की मंशा का अपनी ओर से कोई दावा नहीं करते है।

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