Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने छात्रों पर हुई कथित लाठीचार्ज और गोलीबारी की घटना को लेकर सरकार से सदन में जवाब देने की मांग की।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष की शुरुआत से अब तक मांग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों पर कार्रवाई किसके आदेश पर की गई और इसकी पूरी जानकारी सदन के सामने क्यों नहीं रखी जा रही है। उनके मुताबिक घटना को 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
गृह मंत्री के बयान की मांग पर अड़ा विपक्ष
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री सदन में आकर कथित चंदा घोटाले और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर बयान दें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी माफी की मांग की। खेड़ा ने सरकार के साथ-साथ आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 17-18 दिनों से विपक्ष इन मुद्दों को लगातार उठा रहा है, लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से जवाब मांगा। उन्होंने कथित तौर पर कील लगी लाठियों और पेलेट के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई।
Parliament Monsoon Session: पंजाब में भाजपा-अकाली गठबंधन पर भी प्रतिक्रिया
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन पर कहा कि दोनों दलों ने राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन खो दी है। उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा पंजाब में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल को केवल एक सीट मिली।
चंद्रशेखर आजाद ने भी किया विपक्ष का समर्थन
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने विपक्ष के प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने झारखंड और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर बच्चों से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जहां भी अन्याय हुआ है, वहां न्याय की मांग मजबूती से उठाई जानी चाहिए।
संसद में लगातार जारी गतिरोध के बीच सरकार और विपक्ष के बीच छात्रों के मुद्दे पर चर्चा को लेकर सहमति के संकेत तो मिले हैं, लेकिन विपक्ष गृह मंत्री के बयान और अन्य मांगों पर अब भी कायम है। ऐसे में मानसून सत्र के बचे दिनों में सदन की कार्यवाही सुचारु होने पर संशय बना हुआ है।
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