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लोकसभा में ‘VB-जी राम जी’ बिल पर हंगामा, प्रियंका और थरूर ने जताया विरोध

लोकसभा में ‘VB-जी राम जी’ बिल पर हंगामा

Parliament winter session: लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-जी राम जी) बिल, 2025’ पेश किया, जिसके बाद सदन में तीखा हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस विधेयक का जोरदार विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

नाम बदलने की सनक समझ से परे : प्रियंका गांधी

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का विरोध करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना चर्चा और परामर्श के कानून लाने की कोशिश कर रही है। उन्होनें कहा हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ में नहीं आती। बिना चर्चा और बिना सलाह लिए इस तरह के विधेयक पास नहीं किए जाने चाहिए। सरकार इसे वापस ले और नया विधेयक पेश करे।

Parliament winter session: गांधी के संदर्भ में भी बोली प्रियंका

उन्होंने कहा महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। कोई भी विधेयक किसी की निजी महत्वाकांक्षा, सनक या पूर्वाग्रह के आधार पर न तो पेश होना चाहिए और न ही पास। उन्होंने मांग की कि इस बिल को स्थायी समिति के पास भेजा जाए।

Parliament winter session: थरूर ने भी जताई आपत्ति

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी VB-जी राम जी बिल का विरोध करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना गलत है। उन्होंने कहा कि गांधी का नाम किसी राजनीतिक विजन का नहीं, बल्कि सामाजिक विकास का प्रतीक रहा है।

मनरेगा की जगह लेगा नया बिल

सरकार के मुताबिक, यदि VB-जी राम जी बिल पास हो जाता है तो यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) की जगह लेगा। नए कानून का उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना बताया गया है। बिल में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान है।

नाम और भाषा पर भी सवाल

शशि थरूर ने बिल के नाम पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें दो भाषाओं का मिश्रण किया गया है, जबकि संविधान एक भाषा के प्रयोग की बात करता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना अपने आप में गलत है और राम शब्द को शामिल करने के लिए कई भाषाओं का सहारा लिया गया। हालांकि थरूर ने यह भी कहा कि यह मुद्दा पूरी तरह वैचारिक नहीं है, क्योंकि महात्मा गांधी स्वयं रामराज्य और ग्राम स्वराज की बात करते थे। “गांधी जी के अनुसार रामराज्य तभी आएगा जब ग्राम स्वराज होगा,” उन्होंने कहा। राज्यों की आर्थिक स्थिति पर चिंता

थरूर ने बिल के व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई राज्यों के पास नए नियमों के तहत 40 प्रतिशत मजदूरी भुगतान के लिए पर्याप्त धन नहीं है। उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, जिससे बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया और इस विधेयक पर संसद में गंभीर और विस्तृत चर्चा जरूरी है।

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