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विदेश यात्रा से लौटते ही PM मोदी की हाई लेवल बैठक, सरकार की योजनाओं और वैश्विक हालात पर होगी चर्चा

PM MODI MEETING: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह इस वर्ष मंत्रिपरिषद की पहली बैठक मानी जा रही है और ऐसे समय में हो रही है, जब केंद्र सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।

सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने के निर्देश

बैठक शाम 5 बजे शुरू होगी, जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी केंद्रीय मंत्रियों से राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने को कहा गया है।

PM MODI MEETING: मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा

बैठक में सरकार के प्रदर्शन और प्रमुख नीतिगत फैसलों के कार्यान्वयन की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, अब तक लिए गए निर्णयों और उनके परिणामों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति का भी आकलन करेंगे, ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और जनता तक अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

वैश्विक संकट और तेल कीमतों पर भी नजर

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक हालात और बढ़ती तेल कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार ईंधन आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और बढ़ती लागत के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि मंत्रिपरिषद की बैठक में इन मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हो सकती है।

PM MODI MEETING: चुनावी प्रदर्शन पर भी हो सकती है चर्चा

यह हाई-लेवल मीटिंग पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी के हालिया चुनावी प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में भी अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी रणनीतियों और संगठनात्मक मजबूती को लेकर भी चर्चा संभव है।

5 देशों के दौरे से लौटे प्रधानमंत्री मोदी

बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की कूटनीतिक यात्रा पूरी कर बुधवार को दिल्ली लौटे। इस दौरे मेंसंयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल थे। 15 मई से शुरू हुई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और यूरोप में भारत की आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करना बताया गया।

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