Pradyumna Chaturthi 2026 : ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर प्रद्युम्न चतुर्थी मनाई जाती है। इस बार प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत 18 जून को किया जाएगा। यह दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। गणपति बप्पा की पूजा में दूर्वा जरूर शामिल किया जाता है। इससे गणेश जी प्रसन्न होते हैं और जीवन के विघ्नों को हरते हैं। आईए जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक कथा एवं पूजा अर्चना की विधि…

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में अनलसुर नाम का राक्षस था। यह एक ऐसा राक्षस था, जो मुनियों, देवताओं को जिंदा निगल लेता था। इसने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। राक्षस के प्रकोप से बचने के लिए देवी-देवता और ऋषि-मुनि महादेव और गणपति बप्पा के पास पहुंचे।
Pradyumna Chaturthi
इसके बाद भगवान शिव ने अनलसुर से युद्ध किया और उसके आतंक से ब्रह्मांड को बचाया। गणश जी ने अनलसुर को जिंदा निगल लिया, जिसकी वजह से पेट में भयंकर जलन होने लगी। ऐसे में ऋषि कश्यप ने भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठें बनाकर खाने की सलाह दी। इसके बाद से ही दूर्वा गणेश जी की प्रिय वास्तु बन गई। इसलिए बुधवार या चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने का विधान है।
दूर्वा चढ़ाने से मिलते हैं ये लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अगर आप मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, तो प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। इस दौरान प्रभु को 21 दूर्वा अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि दूर्वा चढ़ाने से व्यक्ति का मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन खुशहाल रहता है।
कब मनाई जाएगी प्रद्युम्न चतुर्थी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 18 जून को प्रद्युम्न चतुर्थी मनाई जाएगी। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत- 17 जून को रात 09 बजाकर 38 मिनट पर। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन– 18 जून को शाम में 06 बजकर 58 मिनट पर ।
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Written By : Anushka








